नकली धर्म कहता है सब उसकी मर्जी से होता है? किसकी मर्जी से होता है? आपके हिसाब से नहीं हो रहा तो वो किसी और के हिसाब से हो रहा है? तो वो उसके हिसाब से क्यों हो रहा है? आपकी बुद्धि कहां फंसी हुई है या फंसाई गई है कि सब आपके हिसाब से नहीं हो रहा? नकली धर्म और उसका फैलाया जाल बुद्धि को फंसाने के लिए ही बनाया गया है। बाहर आने का रास्ता है । उस मार्ग को सीखो, समझो, जो पाना चाहते हों मन को सिर्फ उसपर लगाओ। मन को सुलझने पर लगाओ।वो फालतू बातों में उलझाया जाता है। अगर उलझ गए तो वो नहीं पा सकोगे जो पाना चाहते हो। अगर बिमारी भी आई तो सजग हो जाओ। बिमारी का कारण भी मन ही है।रुक जाओ मन को समझो। ना समझ आए तो जानकारी लो। बिमारी मनोवैज्ञानिक है। मन और शरीर पर वही काम करता है जो आपकी बुद्धि के भीतर चल रहा है और वही सच ही पूरा होगा जो आपकी बुद्धि में चल रहा है या चलाया गया है। सब कुछ शून्य है। बस यही सबकुछ है। सारे प्रयोग बुद्धि को शून्य पर लाने के लिए ही किए गए हैं। जैसे ही विचार शून्य हो जाते हैं यहां से ही खुद की बुद्धि काम करना शुरू करती है। हर विचार से मन मुक्त हो जाता है। अब जो सोचोगे वह स्वयं ही पूरा होने लगेगा। जो करोगे उसका संपूर्ण प्राप्त होगा। बौद्धत्व बुद्धि शब्दों का सही अर्थ, शब्दों का प्रयोग करना, शब्दों का स्वयं के लिए बोलना, शब्दों का दूसरों के लिए बोलना, गुस्से और आवेश में बोले गए शब्द, शब्दों को विचार के रूप में लाना, शब्दों को मन में बैठाना। हर एक शब्द का अर्थ अपने मन पर असर करता है और धीरे धीरे वही सच हो जाता है। बार बार दोहराए गए शब्द मन के भीतर जाकर उनका असर छोड़ते हैं। इसलिए शब्द का सही अर्थ जानने के बाद उनका मन पर शरीर पर और परिवार पर जो प्रभाव पड़ने वाला है वैसे ही शब्दों का सही प्रयोग करें। मन को भीतर से विचार शून्य बनाए रखें।
Comments
Post a Comment