सभी धर्मों की उत्पत्ति

ब्राह्मण को जोड़ा गया है ब्रह्मा से। ब्रह्मा को दिखाया गया है बेटी चोद। बुद्ध निर्वाण को प्राप्त करते हैं यानि पूर्ण सत्य तक पहुँच जाते हैं। अपनी बुद्धि में बचपन तक बैठे हुए विचारों का असर आज के जीवन पर जो पड़ता है वह आपके बचपन की घटनाएं हैं जो माता पिता परिवार के विचारों से जुड़ी है और जो बच्चा उनसे ग्रहण कर रहा है। जब मन के भीतर इन वैचारिक बंधनों से मुक्त होते जाते हैं तो मन पूरी तरह शरीर से जुड़ जाता है और भाव मुक्त हो जाता है यही पूर्ण सत्य यानि निर्वाण की अवस्था है।पहली शताब्दी में क्रिश्चियन धर्म की स्थापना हुई जिसमें एडम और इव से नई संतानों की पैदाइश की बात की गई। यह पहला धर्म है जो निर्वाण तक पहुँचने की बात नहीं करता। यह जिंदगी को आदमी और औरत के संबंध तक सीमित करता है। फिर इस्लाम धर्म पांचवीं शताब्दी में पैदा हुआ जिसमें मोहम्मद ने सम्राट अशोक के शिलालेख पढ़ कर विपसना की हो पर उन्होंने इस बात का अनुभव किया कि मन मोहब्बत का गुलाम है और उनका मन किसी भी एक स्त्री पर नहीं रुक रहा है। इसी अनुभव के अनुसार उन्होंने माना कि एक आदमी तीन निकाह कर सकता है । ताकि अंदर बैठी हवस को शांत किया जा सके। अब आता है ब्राह्मण धर्म इसे जिस प्रकार दिखाया गया है यह पूरी तरह से हमारे बौद्ध इतिहास के विपरीत बना कर इस्लाम से जोड़ कर बनाया गया है। इसमें बुद्ध का खंडन है। पर यह निर्वाण नहीं त्याग को बढ़ावा देता है। पहले यह इच्छा को बढ़ावा देता है, इच्छाओं का गुलाम बनाता है, फिर इच्छाओं से इच्छा तक की बात करता है फिर सारी इच्छाओं को छोड़कर कर नागा साधू यानि नंगे साधू की बात करता है। बुढ़ापे में यह इच्छाओं की गुलामी से मुक्त होने की बात करता है। यही जोड़ा गया है जैन धर्म में भी जिसे दिखाया गया है नंगे जैन मुनि के रूप में। हिन्दू और जैन धर्म दोनों एक ही हैं बस यह ब्राह्मण का आखिरी पड़ाव है। हिन्दू धर्म के खात्मे के बाद सनातन की। और जब लोग इनके सनातन को भी लात मार दें तो जैन धर्म की। महावीर को हवाओं में पुराना बताया गया है 28 वें बुद्ध से। पर महावीर का कोई इतिहास नहीं मिलता। ब्राह्मण धर्म इच्छाओं का जाल बुनता है इच्छाओं में मूलनिवासियों को फंसाता है। पर वो खुद जानता है कि इच्छाओं में फंसा नहीं रहना है। अपनी खास इच्छा को पकड़ कर उसे पूरा करना है, फिर दूसरी इच्छा को पकड़ना है उसे पूरा करना है। और जब मन फंस जाए तो इस्लाम धर्म की तरह आयतें यानि वेद इत्यादि पढ़ना है ज्यादा फंसे तो और शरीर में रोग पैदा होने लगे तो योगा करना है जैसे इस्लाम में पांच वक्त की नमाज़ पढ़ी जाती है। उसमें वो झुक झुक कर पेट की एक्सरसाइज करते हैं पर उन्हें निर्वाण के बारे में कुछ नहीं पता। ब्राह्मण ने लोगों को फंसाए रखने के लिए ही नकली धर्म का निर्माण किया जो निर्वाण के लिए मूलनिवासी पर निर्भर है। वरना मूलनिवासी भी उसके नकली धर्म के जाल में फंसा है। जो इच्छाओं का गुलाम है और अपने आगे की जनरेशन्स को भी इच्छाओं की पूर्ति की तरफ धकेलता है। 

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