असहिष्णुता: ब्राह्मणवाद का असर
ब्राह्मण छात्रा रागिनी दूबे ने प्रिंस तिवारी के छेड़े जाने का विरोध किया तो प्रिस तिवारी को यह नागवार गुजरा, चूंकि ब्राह्मण परिवार में तो कृष्ण की लीला को बहुत महिमा मंडित किया जाता है, और यह छेड़छाड़ तो कृष्ण की लीला कही गई है, फिर इस लड़की जो कि ब्राह्मणवादी मनुस्मृति के अनुसार शूद्र है कि मना करने की हिम्मत कैसे हुई, पर इस बच्ची में आज constitution और अंबेडकरवाद के असर से छेड़छाड़ पर आवाज उठाने का अहसास पैदा हुआ, परन्तु ब्राह्मणवादी male chauvinism के आगे और ब्राह्मणवादी सोच के लड़कों में एक लड़की के प्रति egoism के चलते उसे चाकू गोदकर मार डाला गया। ब्राह्मणवादी वर्ग के द्वारा देश के scientific बौद्ध मठों में अपने मंदिर चला कर कृष्ण की छेड़छाड़ को लीला बताकर और स्त्री के मन में शूद्रता या पैरों से पैदा हुआ बता कर डर की भावना पैदा की जाती है।जिससे देश के ब्राह्मणवादी समाज में स्त्रियों को आज छेड़छाड़ से मुक्त होने के लिए अंबेडकरवादी होना पड़ेगा ताकि वे अपनी संतानों को इस पिछड़ी ब्राह्मणवादी सोच से मुक्त होकर scientific education को promote कर सकें।
Tarunn Asaat
ब्राह्मण छात्रा रागिनी दूबे ने प्रिंस तिवारी के छेड़े जाने का विरोध किया तो प्रिस तिवारी को यह नागवार गुजरा, चूंकि ब्राह्मण परिवार में तो कृष्ण की लीला को बहुत महिमा मंडित किया जाता है, और यह छेड़छाड़ तो कृष्ण की लीला कही गई है, फिर इस लड़की जो कि ब्राह्मणवादी मनुस्मृति के अनुसार शूद्र है कि मना करने की हिम्मत कैसे हुई, पर इस बच्ची में आज constitution और अंबेडकरवाद के असर से छेड़छाड़ पर आवाज उठाने का अहसास पैदा हुआ, परन्तु ब्राह्मणवादी male chauvinism के आगे और ब्राह्मणवादी सोच के लड़कों में एक लड़की के प्रति egoism के चलते उसे चाकू गोदकर मार डाला गया। ब्राह्मणवादी वर्ग के द्वारा देश के scientific बौद्ध मठों में अपने मंदिर चला कर कृष्ण की छेड़छाड़ को लीला बताकर और स्त्री के मन में शूद्रता या पैरों से पैदा हुआ बता कर डर की भावना पैदा की जाती है।जिससे देश के ब्राह्मणवादी समाज में स्त्रियों को आज छेड़छाड़ से मुक्त होने के लिए अंबेडकरवादी होना पड़ेगा ताकि वे अपनी संतानों को इस पिछड़ी ब्राह्मणवादी सोच से मुक्त होकर scientific education को promote कर सकें।
Tarunn Asaat
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