ब्राह्मण वादी समाज में आजादी का मतलब क्या?
ब्राह्मण मन ही मन लोगों को शूद्र होने का अहसास दिलाता है जिस से लोगों को मन में छोटा होने का pressure होता है तो उस pressure को मन से किस प्रकार मुक्त कर सकते हो?
सिर्फ एक विचार से जो बार बार अपने मन में दोहराने से ब्राह्मणवाद से मुक्त हुआ जाए और वह है कि "मैं बौद्ध हूँ मेरा समाज बौद्ध है बौद्ध को ब्राह्मण भगवान मानता है और ब्राह्मण भगवान की सेवा करने के लिए ही पैदा हुआ है", कृपया बौद्ध की सेवा करने का मौका ब्राह्मण को जरूर दें।
जो अपने को ब्राह्मणवादी हिन्दू मानता है और ब्राह्मण के बनाए मंदिर में जाता है उस के लिए तो गीता में लिखा है कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर ऐ इंसान जैसे कर्म करेगा वैसे फल देगा भगवान।
ब्राह्मणवादी व्यवस्था के अनुसार शूद्र का कर्म है बाकी वर्णों की सेवा करना।
और बौद्ध मानने पर आप भगवान स्वरूप बन जाते हैं और ब्राह्मण की मुक्ती बौद्धों की सेवा करने से ही प्राप्त है।
Choose your self
तरूण असात
ब्राह्मण मन ही मन लोगों को शूद्र होने का अहसास दिलाता है जिस से लोगों को मन में छोटा होने का pressure होता है तो उस pressure को मन से किस प्रकार मुक्त कर सकते हो?
सिर्फ एक विचार से जो बार बार अपने मन में दोहराने से ब्राह्मणवाद से मुक्त हुआ जाए और वह है कि "मैं बौद्ध हूँ मेरा समाज बौद्ध है बौद्ध को ब्राह्मण भगवान मानता है और ब्राह्मण भगवान की सेवा करने के लिए ही पैदा हुआ है", कृपया बौद्ध की सेवा करने का मौका ब्राह्मण को जरूर दें।
जो अपने को ब्राह्मणवादी हिन्दू मानता है और ब्राह्मण के बनाए मंदिर में जाता है उस के लिए तो गीता में लिखा है कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर ऐ इंसान जैसे कर्म करेगा वैसे फल देगा भगवान।
ब्राह्मणवादी व्यवस्था के अनुसार शूद्र का कर्म है बाकी वर्णों की सेवा करना।
और बौद्ध मानने पर आप भगवान स्वरूप बन जाते हैं और ब्राह्मण की मुक्ती बौद्धों की सेवा करने से ही प्राप्त है।
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तरूण असात
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