संतुष्ट मन और असंतुष्ट मन
संतुष्ट रहना हमारे मन का भाव है वहीं पर असंतुष्ट रहना भी उसी मन का भाव है।
किसी भी एक वजह से हम संतुष्ट रह सकते हैं वहीं उसी वजह से मन असंतुष्ट हो सकता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? यह है हमारे मन के विचारों को समझना
संतुष्ट रहना हमारे मन का भाव है वहीं पर असंतुष्ट रहना भी उसी मन का भाव है।
किसी भी एक वजह से हम संतुष्ट रह सकते हैं वहीं उसी वजह से मन असंतुष्ट हो सकता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? यह है हमारे मन के विचारों को समझना
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