ब्राह्मण की कहानी और गौतम बुद्ध का सत्य

     

रामायण बच्चों को सुनाई जाने वाली पुरानी कहानी थी जिसमें ब्राह्मण ने बड़े शातिर तरीके से ठाकुरों का मूर्ख बनाया।बड़े ही हास्यास्पद तरीके से राम को पुजवाया ठाकुर दशरथ का बेटा बता कर। पर राम असल में था ब्राह्मण की औलाद जब ब्राह्मण कमरे में जा कर रानियों को खीर खिला कर आया था। मतलब साफ है कहानी में ही सही ब्राह्मण ही पुजेगा। गौतम बुद्ध का वर्चस्व तो पूरे विश्व में है पर यहाँ ब्राह्मण को पुजवाने के लिए रामायण की कहानी ही काम आई थी। इन्हें लगता था शूद्र को तो पढ़ने दिया जाएगा नहीं फिर जो चाहे कहानियाँ सुना दो पर नफरत से भरे ब्राह्मण ने अपनी मूर्खता वहाँ दिखा दी जब गौतम बुद्ध की शिक्षा पूरे विश्व में फैली है तो नफरत की राजनीति पर जन्म लिए ब्राह्मण की नफरती कहानियाँ सुन कर देश के द्रविड़ ब्राह्मण से विश्वास खत्म कर बौद्ध सत्य को अपना लेंगे और असल में बौद्ध इन्हें रोहिंग्या की तरह देश निकाला दे देंगे।
  इन्होंने जात पात और वर्ण व्यवस्था का ड्रामा कर देश के असली द्रविड़ मूलनिवासियों को नीच जता कर अपनी राजनीति को बनाया और अपने को क्षेष्ठ दिखाया पर दअरसल मन तो ब्राह्मण का नफरती और झूठ पर ही था। सो बौद्ध मन तो स्वच्छ होने की वजह से जान ही गया और ब्राह्मण के बारे में पूरे विश्व में फैल गया है कि कितनी नीच स्तर की सोच ब्राह्मण की है और नफरत से भरा ब्राह्मण गौतम बुद्ध के भगवान के स्वरूप को छुपाकर अपनी पूजा करवाने में लग गया परन्तु गौतम बुद्ध की विश्व ख्याति को पचा नहीं पाया और अपच कर बैठा।
पूरे विश्व में ब्राह्मण नाम से ही लोग भागने लगे हैं चूंकि ब्राह्मण झूठ बोलता है झूठ बोलने का तरीका "अश्वत्थामा मारा गया किन्तु हाथी" इसलिए ब्राह्मण सत्य से परे है और विश्वास से भी।
   सत्य तो पूरे विश्व में ख्याति प्राप्त है और वह है बौद्ध।बौद्ध ही सत्य है सत्य ही बुद्ध है।

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