#विपश्यना ही क्यों?

                           विपश्यना ही क्यों?
जब किसी को रोग होता है तो ब्राह्मणवादी उसे योग करने की सलाह देते हैं ताकि वह उस बिमारी को ठीक कर सके और जब योगा करना छोड़ दे तो फिर बीमार पड़ जाए।
विपश्यना वह तकनीक है जिससॆ पता चलता है कि बिमारी का कारण क्या था। Cause is the effect...किसी भी बिमारी का कारण मन में पहले बनता है फिर उस कारण से बिमारी बनती है। यह कारण मन में बैठा रहता है और इंसान उस कारण से ही बीमार होता है।
            देश में बिमारी का एक कारण ब्राह्मणवादी ego है। देश में लोग मंदिर जाते हैं अपनी आस्था ले कर और ले कर लौटते हैं ब्राह्मण वादी घमंड।
ब्राह्मण देश का सबसे egoist बीमार है और जब भी कोई मंदिर जाता है वहाँ से egoism की बिमारी पनपा कर आता है। इसीलिए गठिया,diabities,cancer, skin diseases के सबसे बड़े शिकार ब्राह्मण हैं छत्रिय में भी बहुत egoism है ये दूसरे बहुत बड़े psychological बीमार हैं देश के। अब इन बीमार मंदिरों को follow करने वाले भी बीमार ही होंगे।
देश का सत्य बौद्ध विपश्यना है जो व्यक्ति को सत्य की अनुभूति कराने का कार्य करती है। सत्य का अनुभव इंसान को श्रेष्ठ अनुभव प्रदान करता है। ब्राह्मण तो स्वयं झूठ पर पैदा हुआ है और झूठ पर बने धर्म में बिमारियाँ जड़ी होती हैं। इसलिए ये मानसिक रोगी ब्राह्मण रोग ही देगा सत्यता नहीं दे सकता।
            चलो बुद्ध की ओर।
                                        Tarunn Asaat

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