हिन्दू मानने वाली स्त्रियों और शूद्रों का हाल अपने ही धर्म में


   अपने को हिन्दू मानने वाले शूद्र और स्त्रियाँ भी शूद्र कही गई हैं।
    अब इस धर्म की psychology क्या है, पहले मानसिकता में नीच की भावना पैदा कर दो पैदा होते ही यह भावना बनाना शुरू कर दो कि तुम शूद्र हो जब मन में हीन भावना पैदा हो जाए फिर उसे अपनी हीन भावना से लड़ने दो। जब इनकी जरूरत हो फिर थोड़ा सा प्यार जता दो। इन्हें अहसास होगा कि इनका स्तर उठ गया। आखिर ऊंची जात वाले ने इनका मान बढ़ाया। अपने प्रति सम्मान बनाने का बढ़िया तरीका। ऐसा व्यक्ति अहसान मानने लगता है।
वहीं बौद्ध साफ रूप से इंसानों से प्रेम करते हैं वे पहले किसी में हीन भावना पैदा कर उस पर अहसान जताने से मुक्त हैं। बौद्ध अपने मस्तिष्क की भावनाओं को पूर्ण रूप से समझते हैं वे सम्पूर्ण प्रेम के जानकार हैं। इनके मन के विचार पूर्णतया खुले हैं। इनके रिश्ते सम्पूर्ण होते हैं। ये मूर्खों के धर्म से मुक्त हैं जिसके अलग अलग वर्ग अपने शरीर का पूर्ण प्रयोग करने में अपूर्ण हैं। ये अपने सिर का उपयोग करने में इतना लग जाते हैं कि इनका बाकी शरीर बेकार हो जाता है। यह वर्ग बुद्धि का प्रयोग कर पाने से पैदल है इनके बुद्धि का विकास इनके अहंकार ने वर्जित कर दिया है ये जहाँ भी नाक मुंह घुसेड़ने की सोचते हैं वहाँ से ये भगा दिए जाते हैं। इनका दूसरा वर्ग अपने हाथ और सीने को फुलाने में लगा रहता है पर ये वर्ग भी बुद्धि से पैदल हैं। इनका तीसरा वर्ग पेट भरने में लगा रहता है ये भूख का मारा वर्ग है यह अपने भूखे मन में खाने में इतना मरते रहते हैं कि पेट की बड़ी बिमारियों के रोगी इसी वर्ग में होते हैं। ये भी बुद्धि से पैदल हैं चूँकि ये भी कुछ वर्गों को नीच इत्यादि मानते हैं। ये तीन वर्ग इस धर्म में ज्यादातर नपुंसकता की तरफ जा रहे हैं चूँकि इनका यह वर्ग अहंकार से पूर्णतया मुक्त है सारी potency इसी वर्ग में है। पर सम्पूर्णता का अभाव इन सभी वर्गों में लगा रहता है।
   बौद्ध पूरी दुनिया में ही अपनी बुद्धि का संपूर्ण उपयोग करना जानते हैं। ये अहंकार द्वेष इत्यादि को पहचान लेते हैं और उससॆ मुक्त होने की प्रणाली इन्हें गौतम बुद्ध के द्वारा प्राप्त है जो बौद्ध परिवार में पैदा होने से प्राप्त है।इसलिए बौद्ध होने के लिए विपश्यना की तकनीक का प्रयोग करें और संपूर्ण हो जाएँ।
     तरूण असात

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