ब्राह्मण की वर्ण व्यवस्था और बौद्धों की प्रेम व्यवस्था

ब्राह्मण समाज में वर्ण व्यवस्था बौद्ध समाज में प्रेम व्यवस्था। ब्राह्मण बौद्धत्व प्राप्त करने से हमेशा ही दूर है। जो मनुष्यता में जात पात की भावना फैलाता रहा हो और दूसरे को अपने से नीच कहता हो उसमें पूरी दुनिया क्या देखेगी, मूर्खता जड़बुद्धिता या बुद्धिहीनता ही ब्राह्मण में दिखाई देती है और ऐसे वर्ग को भी लोग त्याग देने में ही अपना भला समझते हैं।
      बौद्ध कौन हैं? अपने मन की असीमित शक्तियों और प्रेम को समझने वाले ही बौद्ध कहलाते हैं। गौतम बुद्ध, बोधीधर्मा जैसे बौद्धों ने विश्व को मन को पहचानने वाली और उस से असीमित शांति एवं शक्ति को प्राप्त करने का रास्ता दिया गया है। विपश्यना के द्वारा हम deep meditation करते हैं और मन की गहराइयों को समझते हैं।और प्रेम की अनुभूति करने के साथ करवाने का ज्ञान भी प्राप्त होता है।

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