बौद्ध का बौद्धत्व और ब्राह्मण का ब्रह्म ज्ञान

                         
बहुत ही हास्यास्पद तरीके से ब्राह्मण ने अपने को ब्रह्माण्ड का ज्ञानी बताया है, पर उसने ब्राह्मणों को ज्ञान को अर्जित करने से कोसों दूर रखा है जो अपने को महान और दूसरों को नीच बताते हों उनके मन को तो पूरा विश्व जान गया होगा इनका नज़रिया जो इनके मन का चित्रण करता है। यह साफ दर्शाता है कि ब्राह्मण के द्वारा अपने को बड़ा जताने से उसका घमंड साफ साफ दिखाई देता है। तो अब समझना बहुत आसान है कि ब्राह्मण का ब्रह्माण्ड है क्या ?  ब्राह्मण यानि वराहमन यानी सूअर का मन और सूअर के मन वाला व्यक्ति कहाँ जाता है ? कीचड़ में, और यही कीचड़ से भरा तलाब ही ब्राह्मण का ब्रह्माण्ड है। इसीलिये इस कीचड़ से भरी सोच वाले वर्ग ने पूरी दुनिया को क्या दिया? एक ऐसा धर्म जिसमें स्वयं को ऊंचा और दूसरों को नीचा जताया जाए। यह शुद्ध घमंड है। जिस के सिर पर घमंड हावी हो वह ज्ञान अर्जित कर पाने से कोसों दूर होगा।इनको हमारे देश के बौद्धों से जो बौद्धिक शास्त्र नालंदा विश्व विद्यालय से प्राप्त हुए उससे इन्होंने यह तो जान लिया कि विचारों को जानने के पश्चात अपनी वाणी एवं शब्दों की शुद्धता से व्यक्ति को सम्मोहित किया जाता है परन्तु इन्हें गौतम बुद्ध ,महावीर, ईसा मसीह, गुरू नानक साहब, कबीर साहेब की तरह enlightenment प्राप्त करने से कोसों दूर रहे। इस से इन्होंने अपने वर्ग को शीर्ष पर रखने के लिए उल जलूल किताबें लिखी और फैला दी ताकि क्षतरीय वैश्यों और शूद्रों को ये सम्मोहित कर अपने बनाए धर्म के जाल में फंसा कर रख सकें। पर बुद्धि के विकास के साथ सभी वर्ग ब्राह्मणों को कोसने लगे कि बुद्धि के विकास के बजाय ब्राह्मण मूर्खता पूर्ण कर्मकाण्ड करने में और समाज को गुमराह करने में लगा था पर बुद्धि का विकास स्वयं ब्राह्मणों का भी नदारद था। ब्राह्मण इतनी जड़ बुद्धि है सिर से पैदा तो बताया अपने को पर बौद्ध ज्ञान से नदारद रहा और अपने को शीर्ष पर रखने के लिए दूसरे के लिए मूर्खतापूर्ण शब्दों का गठन कर अपनी मूर्खता का परिचय दे रहा है।
   दलित शब्द का गठन कर प्रचलित कर रहा है पर मूर्ख ब्राह्मणवादियों का बनाया दलित ब्राह्मणवादियों का दलन ही करेगा। इसीलिए इस मूर्ख ब्राह्मण वर्ग ने मानसिक बिमारी को बढ़ाने का कार्य किया और बिमार होकर मोरों को बारिश की पैदाइश तक बताया। अब यह वर्ग हंसी का पात्र है और देशवासी इन्हें देख कर हंसते हैं और इन्हें ignore कर आगे बढ़ जाते हैं।
         पूरी दुनिया में बौद्ध विचारधारा प्रचलित है। बौद्ध विचारधारा दूसरे को बुद्धिमान बनने और बुद्धि के विकास में सहायक है। जो भी बौद्ध राष्ट्र हैं वहाँ बुद्धिमानीपूर्ण कार्य हो रहे हैं और बुद्धि का प्रचलन और विकास हो रहा है।
तरुण असात

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