बौद्ध सनातन में ब्राह्मण और ब्राह्मणवादियों का स्थान

बौद्ध धम्म सदियों से हमारे देश में है इसकी मान्यता पूरे विश्व में फैली है ।बौद्ध धम्म में देश के मूलनिवासी बौद्धों का स्थान सर्वोच्च एवं सर्वोपरि है। ब्राह्मण जब अपने वर्ण का निर्माण किया था तो उसने यह स्वीकार कर लिया था कि वह भगवान की सेवा सुश्रुता के लिए ही पैदा हुआ है। उसने राजपूत को भगवान की सुरक्षा में खड़ा कर दिया और वैश्या वर्ण को भगवान के लिए वैश्यावृत्ति कर धन कमा कर लाने में लगा दिया ताकि भगवान को धन और वैभव प्राप्त रहे। पाली भाषा में भगवान शब्द का बतलब है जिसकी तृष्णा नष्ट हो जाए। मूलनिवासी बौद्ध ही वह वर्ग है जो तृष्णा से मुक्त है। तो भगवान भी मूलनिवासी बौद्ध ही हैं, तो ब्राह्मण को अपनी सेवा में लगे रहने दो, राजपूत को आपके लिए चौकीदार बनने दो और वैश्य को धन कमाने दो आप उस धन को वैश्य से लेकर बच्चों की शिक्षा एवं देश के बढोतरी के लिए लगाओ। चूंकि बुद्धि बौद्ध के पास ही है तो देश की सत्ता को बौद्ध मूलनिवासियों को ही सम्हालना पड़ेगा।
              जो वैश्य वैश्यावृत्ति से मुक्त होना चाहते हैं तो ब्राह्मणवाद और सरनेम पूर्णतः त्याग कर बौद्ध मत में शामिल हो सकते हैं।
    अब संतुष्ट रहने के लिए क्या करेंगे सिर्फ एक विचार आप देश के मूलनिवासी बौद्ध है ।
 अब सनातन सनातन करने वालों के लिए सनातन में दो वर्ण है एक बौद्ध जो भगवान हैं और दूसरा वर्ण है ब्राह्मण मानसिक अपंग जो निरा मूर्ख है और मानसिक रूप में अपंग है जो भगवान के बताए इशारों पर ही चलता है। 

Comments

  1. Achchaa chutiye,
    Ye tere baap ne padhaayaa tum.logo ko
    Bhai vaisyaa kaa Matlab vyaapaari hotaa hai aur tum logo ne to use vaisyaavratii se jod diyaa,
    I will report your blog to it cell and cyber cell

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    1. मूर्ख वैश्यावृत्ति भी तो व्यापार है।

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    2. करी नहीं चूतिये

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  2. मानसिक अपंग ब्राह्मण असल में यूनानी
    https://tbfert.blogspot.com/2019/12/blog-post.html

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