दशहरे का असली स्वरूप


दशहरे पर जो पुतला जलाया जाता है वह पुश्यमित्र शुंग का है। अब पुश्यमित्र शुंग कौन है? यह ब्राह्मण दास था जो ब्रहदरथ मोर्य, जो कि एक बौद्ध राजा था के राज्य में कार्यरत था।उस समय में ब्राह्मण निचले दर्जे का वर्ग था जो बाहर के देश से हमारे देश में शरण लेने आया था जो देश में नाली सफाई इत्यादि का कार्य करने लगा था। पुश्यमित्र शुंग ने किसी प्रकार अपने को ब्रहदरथ मोर्य की सेना का सेनापति  बनवा लिया और धोखे  से ब्रहदरथ को चाकू से मार डाला।तभी से ब्राह्मणों से देशवासियों का विश्वास खत्म हो गया और पुश्यमित्र का पुतला दशहरे के दिन जलाया जाने लगा। इसी को बाद में रावण के एक काल्पनिक पात्र से जोड़ दिया गया जो कि असल में एक कहानी का पात्र भर ही था। ऐसे ही बौद्ध स्तूप को नकली टुुुुुच्चे  शिव लिंग बता कर प्रचलित किया गया। यह वही छोटा बौद्ध स्तूप हैं । बाकी जो भी ब्राह्मण मंदिर में वह छोटे मनौती स्तूप हुआ करते थे जो बुुद्ध की  बुद्धि से जुड़े मानेे जाते हैं उनको ही  छुपाने के लिए बनाया गया लिंग। यह नकली धर्म  से जोड़ कर बताए गए किसी नकली करैैक्टर  शिव का लिंग।जिसमें बौद्ध स्तूप को बुुद्धि से उत्पन्न मानकर बनाया जाता था जिसमें अत्यधिक ऊर्जा का संचार उत्पन्न होती है ऐसा माना जाता था।

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