भगवान ,बौद्ध एवं जैन मत का शब्द

भगवान शब्द पाली भाषा का शब्द है यह कहीं भी ऋग्वेद में प्रयुक्त नहीं हुआ है इस शब्द का प्रयोग जैन मत में हुआ है या बौद्ध मत में और ये दोनों ही मूल भारतीय धर्म हैं।
              भगवान शब्द बना है भग्ग +वान जिसका शाब्दिक अर्थ है हटा देना, नष्ट कर देना

बुद्ध ने कहा है
भग रागो भग दोशो भग मोहो आधो
भग अस्वा पाठ धम्मा भग्वा ते उचति
मतलब वह मानव जो अपनी इच्छाओं से मुक्त हो जाए, जो अपनी अज्ञानता को मिटा दे, लालच से मुक्त हो जाए, हवस से मुक्त हो जाए, वही भगवान है।
ऐसा प्रतीत होता है ब्राह्मणों ने लिंग को भगवान बना कर पुजवाने में भगवान के शाब्दिक अर्थ का ही अनर्थ कर दिया। ऐसा इन्होंने मूलनिवासियों को बुद्ध इतिहास से हटाने के लिए भगवान शब्द का प्रयोग नकली मूर्तियों के लिए किया।

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