ब्राह्मण का विदेशीपन मूलतः सीरिया से आया हुआ

आज जो ब्राह्मण दिखाई देता है वह हमारे देश का है ही नहीं वह सीरिया से आया था।जो हमारे देश में अपने मंदिर खोल कर अय्याशी करने बैठे हैं। वर्षो तक इन्होंने अपने को भारतीयों से अलग रखा फिर इन्होंने ब्रहदरथ को मारा और पहली बार ब्राह्मण का इतिहास में नाम आया। दअरसल ये भारत के इतिहास को जानते रहे और जब सम्राट अशोक के बाद के ज्यादातर जनसंख्या बौद्ध हो गए तो इन्होंने पहले ब्रहदरथ जो कि दसवाँ मौर्य राजा था को मारकर कुछ अफवाह फैलाई होगी जिससे विद्रोह ना हो। फिर धीरे धीरे बौद्ध उपासकों का दमन और इतिहास में एक मोड़ दिया गया। इन यूनानियों ने पहले बौद्ध धम्म के अनुसार बुद्धिमानों को जो कि उस समय में ब्राह्मण कहे जाते थे, स्वयं को ब्राह्मण घोषित किया। मनु से बनवा कर वर्णव्यवस्था स्थापित की। इसी को इन्होंने कहा कि ब्राह्मण ने देश को छत्रिय विहीन किया।दअरसल उस समय के क्षत्रिय मौर्य थे। जिन्होंने इस सीरियाई जात पर भरोसा रखकर इन्हें शासन में जगह दी वरना ये सिपाही बनने के भी काबिल ना रह गए थे। ये जब सिकंदर के साथ आए थे तो स्त्रियों को साथ नहीं लाए थे। इसीलिए इन्होंने यहाँ की स्त्रियों को अपने शास्त्रों में शूद्र कहा और हमारे शास्त्रों और बौद्ध ऐतिहासिक धरोहरों को धीरे धीरे खत्म किया और नष्ट करते चले गए। बाद में जब हूण हमारे देश में आए या इनके द्वारा लाए गए सत्ता स्थापित करने के लिए तो उन्हें क्षत्रिय बना दिया और हमारे देश के क्षत्रियों को शूद्र बना दिया और और बहुत मार काट व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर डर बनाया भगवान के नाम पर अजीब अजीब विक्षिप्त मूर्तियों के रूप में जैसे दस हाथों वाला आदमी, चार हाथों वाली औरत इत्यादि। सत्ता में बने रहने के लिए ही इन्होंने मुस्लिम को देश में बुलाया और फिर अपनी बेटियाँ मुस्लिम शासकों को दे कर सत्ता से जुड़े रहे। जैसे आज के समय में भी सतीश चन्द्र मिश्रा मायावती से जुड़ा है।मौर्यों से आज भी इनकी फटती है इसीलिए मौर्यों से ये बच कर ही रहते हैं। इसको और research या अनुसंधान करके कड़ी से कड़ी जोड़कर देखा जा सकता है।

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