पूरी दुनिया वाले ये जरूर सोचते होंगे कि आखिर ब्राह्मण को जातिवादी हिन्दू धर्म बनाने की जरूरत क्यों पड़ी होगी?
इतिहास में ब्राह्मण की पहचान एक हारे हुए यूनानी की है जो हमारे देश के श्रेष्ठ राजाओं से हारे थे। फिर हमारे देश में ब्राह्मण की पहचान नौकर जैसी थी जिसे उसने अपनी झेंप मिटाने के लिए अपने को श्रेष्ठ और मूलनिवासी श्रेष्ठ मौर्यों और बाकी श्रेष्ठ बौद्ध मूलनिवासियों को नीच और शूद्र बता कर अपने धर्म का निर्माण हमारे बौद्ध धम्म की विचारधारा को मिटा कर किया था।
जब से बाबा साहेब ने बौद्ध धम्म को दोबारा से देश में विश्व पटल से जानकर पुनर्जीवित कर स्थापित किया है ब्राह्मण रूपी यूनानी की देश और विश्व में श्रेष्ठता निम्न हो गई है। इस प्रकार जातिवाद तो नष्ट हुआ ही है मूलनिवासियों की विश्व में श्रेष्ठ पहचान उजागर हुई है।
इतिहास में ब्राह्मण की पहचान एक हारे हुए यूनानी की है जो हमारे देश के श्रेष्ठ राजाओं से हारे थे। फिर हमारे देश में ब्राह्मण की पहचान नौकर जैसी थी जिसे उसने अपनी झेंप मिटाने के लिए अपने को श्रेष्ठ और मूलनिवासी श्रेष्ठ मौर्यों और बाकी श्रेष्ठ बौद्ध मूलनिवासियों को नीच और शूद्र बता कर अपने धर्म का निर्माण हमारे बौद्ध धम्म की विचारधारा को मिटा कर किया था।
जब से बाबा साहेब ने बौद्ध धम्म को दोबारा से देश में विश्व पटल से जानकर पुनर्जीवित कर स्थापित किया है ब्राह्मण रूपी यूनानी की देश और विश्व में श्रेष्ठता निम्न हो गई है। इस प्रकार जातिवाद तो नष्ट हुआ ही है मूलनिवासियों की विश्व में श्रेष्ठ पहचान उजागर हुई है।
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