नजरिया कैसे बनता है? जब व्यक्ति के बचपन के माहौल से एक प्रकार की सोच बनती हैं जैसे बचपन में माहौल में यह विचार मिले कि पीपल के पेड़ पर भूत होते हैं तो scientific सोच पाने के बावजूद बड़े होने पर भी पीपल को अपने घर आंगन में उगाने से मना करते हैं।
ऐसे ही बहुत से विचार जो हमें हमारे माहौल से प्राप्त होते हैं यही नजरिया है।मतलब साफ है पुरानी सोच आज के विचारों को दूषित करती है तो मन वर्तमान में नहीं है इस मन को जब हम वर्तमान में ले आते हैं तो विचार साफ रहते हैं और रिश्तों में प्रगाढ़ता आती है।
पर विचारों को वर्तमान में कैसे रखें। इसके लिए बौद्ध विपश्यना एक प्राचीन तकनीक है जिससे अपने मन को वर्तमान में रख प्रसन्न मन का अहसास बनाया जाता है। इस विद्या में अपने मन को अपनी सांस को महसूस करने पर लगाते हैं ।बार बार अपने मन को सांस पर रोकते हैं जिससे मन पूर्णतः सांस को महसूस करने लगता है और मन विचारों से मुक्त होता है। इस अवस्था के बाद अपने मन को अपने मस्तिष्क और शरीर में झाकने पर लगाया जाता है और महसूस किया जाता है इस प्रक्रिया से मन अपने ही शरीर को वर्तमान में महसूस करता है और मन वर्तमान में ही रहता है।
ऐसे ही बहुत से विचार जो हमें हमारे माहौल से प्राप्त होते हैं यही नजरिया है।मतलब साफ है पुरानी सोच आज के विचारों को दूषित करती है तो मन वर्तमान में नहीं है इस मन को जब हम वर्तमान में ले आते हैं तो विचार साफ रहते हैं और रिश्तों में प्रगाढ़ता आती है।
पर विचारों को वर्तमान में कैसे रखें। इसके लिए बौद्ध विपश्यना एक प्राचीन तकनीक है जिससे अपने मन को वर्तमान में रख प्रसन्न मन का अहसास बनाया जाता है। इस विद्या में अपने मन को अपनी सांस को महसूस करने पर लगाते हैं ।बार बार अपने मन को सांस पर रोकते हैं जिससे मन पूर्णतः सांस को महसूस करने लगता है और मन विचारों से मुक्त होता है। इस अवस्था के बाद अपने मन को अपने मस्तिष्क और शरीर में झाकने पर लगाया जाता है और महसूस किया जाता है इस प्रक्रिया से मन अपने ही शरीर को वर्तमान में महसूस करता है और मन वर्तमान में ही रहता है।
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