क्या आप जानते हैं ब्राह्मण हिन्दू है और प्राचीन मुसलमान भी है

ब्राह्मण,संस्कृत और उसके सारे देवी देवता हमारी धरती या कहें तो हमारे देश से हैं ही नहीं। ब्राह्मण धर्म और मुस्लिम धर्म दोनों एक ही हैं। कमल हासन और नादिया हसन दोनों एक ही हैं, दोनों के सरनेम एक ही हैं। कमल हासन ब्राह्मण  हिंदू है और नादिया पाकिस्तानी मुस्लिम है। ऐसे  ही महेश भट्ट हिंदू ब्राह्मण है  और गनी भट कश्मीरी  मुसलमान है। यह संबंध बताता है कि ब्राह्मण असलियत में मुसलमान से ही निकला है और नकली धर्म की आड़ में ब्राह्मण को सिर्फ हमारी बौद्ध संस्कृति को नष्ट करके नकली धर्म मूलनिवासियों पर थोपना था।  ऐसे  ही एक और धर्म हमारे बौद्ध इतिहास में घुसेड़ दिया गया है जो है जैन। इस धर्म को भी साजिश के तहत ही बनाया गया है। इसका सीधा जुड़ाव विदेशी मूल से जुड़े लोगों से दिखाई दे रहा है। अमित शाह और मोहम्मद शाह कि मूल जुड़ाव विदेशी मुसलमान ही है। इस धर्म को भी मूलनिवासियों के बीच में इसी प्रकार से घुसेड़ा गया है। सबसे ज्यादा हिन्दू मुसलमान करने वाला ये नरेन्द्र मोदी जो संस्कृत को हमारे देश की प्राचीन भाषा बता कर प्रचारित कर रहा था वह भी हमारी मूल पाली भाषा का विकृतिकरण है। पाली भाषा के मूल शब्दों का अर्थ आज भी भारतीय मूल भाषाओं में मिलता है, जैसे तमिल, मराठी, पंजाबी इत्यादि। पाली भाषा से ही हमारी सभी मूल भाषाओं का उदय हुआ है। परंतु हिंदी भाषा में इस्लाम का प्रयोग किया गया है। अब जो हमारे  बौद्ध देश का है ही नहीं उसके नाम पर ये बदलाव क्यों?
 हमारी संस्कृति में और इतिहास में ब्राह्मणवादियों ने जो अपनी संस्कृत, अपना रिगवेद और इतिहास हमारे इतिहास में घुसाया हुआ है वह दअरसल हमारे देश और धरती का है ही नहीं। हमारे बौद्ध इतिहास और ग्रंथ ही देश की असली धरोहरें हैं जिन्हें दोबारा से देश में असली धम्म के रूप में स्थापित किया जाना है। सभी मूलनिवासी बौद्ध धम्म को अपनाएं और सिखों को बौद्ध सिख बना कर मूलतः बौद्ध बना कर स्थापित करें।  हमारे बौद्ध इतिहास में सिख चमार पंथ को आगे की संस्कृति में जोड़ कर संपूर्ण इतिहास का गठन किया जाए। इसमें तमिल संस्कृति से भी इतिहास को आगे बढ़ाकर जोड़ कर बढ़ाया जाए। नकली धर्म के सारे मंदिरों को ध्वस्त किया जाए और पुनः बौद्ध मंदिरों और विहारों को स्थापित किया जाए। जो हमारी मूल संस्कृति है उसे स्थापित किया जाए। पड़ोसी देशों से बौद्ध इतिहास और धम्म ग्रंथों को लाकर धम्म संघ का निर्माण किया जाए।

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