हमारी बौद्ध संस्कृति बहुत ही शांत प्रवृत्ति को संबोधित करती है विपश्यना बहुत ही शांत माहौल में की जाती है। वही ब्राह्मण के त्योहार उसके पूजा पाठ का तरीका, मंदिर में घंटा बजा कर शोर मचा कर तेज तेज आरती गाकर पूजा की जाती है। होली बहुत हुड़दंग और अश्लील त्योहार है जो साफ दर्शाता है कि हमारी संस्कृति के विपरीत है। वहीं पर दिवाली भी पटाखे और शोर को संबोधित करता है जो शायद बौद्धों के विपश्यना में व्यवधान डालने के लिए ही बनाया गया हो। होली में स्त्रियों के साथ अश्लील हरकतें होती हैं जबकि बौद्ध संस्कृति में स्त्रियों को बहुत सम्मान मिलता है।
ये दोनों ब्राह्मणी त्योहार हमारी संस्कृति के विपरीत हैं।
ये दोनों ब्राह्मणी त्योहार हमारी संस्कृति के विपरीत हैं।
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