ब्राह्मण के द्वारा नीची जात पात बनाने की सोच

बच्चे का मन बहुत साफ(pure) होता है जिसका अंतर्मन और बाह्य मन दोनों एक स्तर पर होते हैं।जिससे जो उसके मन में बचपन में डाला जाता है वह उसके अंतर्मन में जा कर प्रबल हो जाता है।
बचपन से उस के मन पर अपने माता पिता की सोच का बहुत प्रभाव पड़ता है।किसी की जाति का निर्धारण कर उसे नीच जाति का बना दो तो समाज में वह अपनी जाति छुपाता रहेगा और अपने  को हीन भावना अंदर ही अंदर देता रहेगा और मन से बचपन से ही मानसिक रूप से प्रबल नहीं हो पाएगा। बचपन में माता पिता की प्रबल सोच बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती है। पर जो माता पिता अपने मानसिक स्तर में नीच जाति के प्रभाव में हों वे अपने बच्चे को नीच होने की चिड़चिड़ापन वाली सोच देंगे। हमारे देश में ब्राह्मण ने जाति पर गर्व करना अपने बच्चों के मन में भरा और दूसरों के लिए नीच की भावना की चिड़न भी उनके मन में भरी।  हमारे देश में  हिन्दू  नाम के धर्म की स्थापना कर उसकी आड़ में अपनी नीचता का खूब खेल खेला और समाज में सरनेम लगा कर अपनी जाति का प्रदर्शन शुरू हो गया।
समय परिवर्तन के साथ साथ और सच की जानकारी बढ़ने के साथ वर्णव्यवस्था के संस्थापक ब्राह्मण जो कि सीरिया की मितन्नी सभ्यता से आया है के निम्न स्तर की सोच के बारे में पूरे विश्व में जानकारी बढ़ने लगी और हमारे देश में मूलनिवासी सोच और बौद्ध होने की प्रबल इच्छा शक्ति हमारे समाज में बढने लगी और जाती पाती की नीच सोच से भी मुक्ति हुई। ब्राह्मणवादियों को सम्पूर्ण विश्व में विरोध मिलने लगा और इनकी नीच सोच की वजह से इनका मानसिक पतन पूरे विश्व के सामने है।

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