प्राचीनतम बौद्ध एवं नई ब्राह्मण मितन्नी सभ्यता हमारे देश की दो सभ्यताएं


हमारे देश में दो सभ्यता हैं पहली हमारी बौद्ध सभ्यता जो प्राचीनतम है। यह हमारे देश के मूलनिवासी द्रविड़ों की सभ्यता है।सिंधू घाटी की सभ्यता से लेकर गौतम बुद्ध तक देश में 28 बौद्ध हुए हैं। गौतम बुद्ध ने बौद्ध मान्यता को संपूर्ण देश में प्रचलित किया था। इनके बाद भी एक बुद्ध हुए हैं जिनका नाम था बोधीधर्मा इन्होंने बौद्ध मान्यता में नया रूप आविष्कृत किया था। बोधीधर्मा ने अपने अंदर उस रूप का दर्शन किया था जिसे विज्ञान में 10^ -22 का wave behavior of body कहा जा सकता है। बौद्ध पूरी तरह से वैज्ञानिक व scientific मान्यता थी जिसे ब्राह्मण ने मूर्खतापूर्ण भक्ति भाव से जोड़ दिया था। भक्ति भाव एक अतार्किक मूर्ख रूप बनाने का तरीका है जिसमें व्यक्ति का तर्क खत्म कर दिया जाता है ऐसे लोग मन को दूसरे के अनुसार बताए गए मार्ग पर रोबोट की तरह चलने पर विवश रहते हैं ।ये तर्क विहीन होने से गुलाम हो जाते हैं।
दूसरी है ब्राह्मणवादी सभ्यता जिसने हमारे इतिहास को छुपा कर अपनी मितन्नी सभ्यता को हमारे देश पर थोपने का प्रयास किया है।
जैसे पाली भाषा में भगवान का मतलब  तृष्णा को नष्ट करने वाला। संस्कृत में भगवान के मायने ही बदल दिए गए। भगवान यानी धूर्त लड़ाकू, व्यसनी ,दूसरे से लड़ कर जीतने वाला शक्तिशाली ना कि मन को जीतने वाला शक्तिशाली इत्यादि।
संस्कृत में बहुत से शब्दों के अर्थ बदले गए हैं।
उस समय में बुद्ध विश्व में बहुत प्रचलित थे इसीलिये चीनी यात्री हमारे देश में बुद्ध के बारे में जानने के लिए आते थे।उस समय बोधीधर्मा ने शाउलिन टैंम्पल का निर्माण चीन में कर दिया था और उन्होंने वहाँ पर बुद्ध को बहुत प्रचलित कर दिया होगा। और नालंदा भी उस समय बहुत popular थी। यही उत्सुकता ने उन्हें भारत आने पर विवश किया होगा।
बुद्ध से पहले भी 28 बौद्ध ज्ञात हैंं उन्हीं में से एक विपस्सी बौद्ध ने विपश्यना की स्थापना की थी जो कि मन की science को समझने का बेहतरीन तरीका है।

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