अमर उजाला भी खरीदना बंद
राफेल सौदे पर मीडिया कैसे मोदी की तरफदारी करता है
Point1-  2012 में reliance defence में सौदा हो गया था पर reliance defence बनी ही 2015 में है।
Point2- किसी के अहंकार की तुष्टी के लिए जेपीसी गठन नहीं। क्यों रविशंकर डर लग रहा है जेपीसी गठन पर, सारा कच्चा चिट्ठा खुल जाएगा देश के सामने। पर वो तो अब खुलेगा ही।सतय तो सामने आ कर ही रहेगा।
Point3- दो कंपनी के बीच फ्रांस सरकार की कोई भूमिका नहीं पर भारत सरकार की भूमिका तो ओलांद बता चुके हैं।
Point4- दसाल्ट ने reliance को आफसैट पार्टनर चुना ऐसा कब हुआ चूंकि reliance defence ही 2015 में बनी और agreement 2012 में हो गया था।

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