ब्राह्मण के द्वारा बनाई गीता मूर्खता से भरी और अवैज्ञानिक सोच की किताब है जिसमें पूर्णत: ब्राह्मण की अति मूर्ख सोच दिखाई देती है।वैसे जितना विस्तार से आप बौद्ध विचारधारा को जानेंगें आपको ब्राह्मण की अत्यधिक मूर्खता का परिचय प्राप्त होता जाएगा।
जैसे इस श्लोक में दिया गया है कि भगवान का अवतार पैदा होता है। जबकि पाली भाषा के अनुसार वह व्यक्ति भगवान कहा जाता था जो तृष्णा मुक्त हो जाए। इस प्रकार हमारे देश में गौतम बुद्ध से पहले 28 बौद्ध और भी हुए हैं जिन्हे हम भगवान का दर्जा दे सकते हैं। पर यह अवतार वाद तो अत्यधिक हास्यास्पद है।
अगर ऐसा ही है तो जब ब्राह्मण ने हमारे देश को गंभीर जातिवाद में धकेला तो बाबा साहेब ने जन्म लिया और देश में फिर से बौद्ध परंपरा की शुरूआत करके देश को घोर ब्राह्मण वाद से मुक्त किया। तो बाबा साहेब हमारे लिए भगवान हुए। जब हमारा representative संसद में नहीं पहुँच रहा था और हमारी सरकार नहीं बन रही थी तो कांशीराम साहब का जन्म हुआ और हमारी सरकार बननी शुरू हुई। हमारे एक और भगवान के रूप में पैदा होते जा रहे हैं। इसीलिए ब्राह्मण को लगा कि बौद्ध धम्म से हमें अलग करके हमें गीता के मूर्ख ज्ञान से अवगत करा कर देश में बौद्ध भगवान पैदा होने से रोक लेंगे तो यह मूर्खता से भरी सोच भी ब्राह्मण की नीचता को छुपा नहीं सकेगी। ब्राह्मण हम बौद्धों के ज्ञान के सामने नीच और अदना सा दिखाई देता है। इसी नीचता की सोच को छुपाने के लिए बेचारे ब्राह्मण ने वर्णव्यवस्था का निर्माण किया पर वह भी constitution या संविधान के सामने खत्म हो गई। बेचारा मूर्ख ब्राह्मण अपनी नीच सोच का परिचय किसी ना किसी रूप में देता रहता है। तो ब्राह्मण जात पर अब सिर्फ हंसा ही जा सकता है चूँकि इसके मूर्खतापूर्ण दाव अब खत्म हो चुके हैं और बुद्धि से ब्राह्मण जात बिलकुल गरीब है। अब हमारी परंपरा में बुद्ध ही सत्य हैं।
जैसे इस श्लोक में दिया गया है कि भगवान का अवतार पैदा होता है। जबकि पाली भाषा के अनुसार वह व्यक्ति भगवान कहा जाता था जो तृष्णा मुक्त हो जाए। इस प्रकार हमारे देश में गौतम बुद्ध से पहले 28 बौद्ध और भी हुए हैं जिन्हे हम भगवान का दर्जा दे सकते हैं। पर यह अवतार वाद तो अत्यधिक हास्यास्पद है।
अगर ऐसा ही है तो जब ब्राह्मण ने हमारे देश को गंभीर जातिवाद में धकेला तो बाबा साहेब ने जन्म लिया और देश में फिर से बौद्ध परंपरा की शुरूआत करके देश को घोर ब्राह्मण वाद से मुक्त किया। तो बाबा साहेब हमारे लिए भगवान हुए। जब हमारा representative संसद में नहीं पहुँच रहा था और हमारी सरकार नहीं बन रही थी तो कांशीराम साहब का जन्म हुआ और हमारी सरकार बननी शुरू हुई। हमारे एक और भगवान के रूप में पैदा होते जा रहे हैं। इसीलिए ब्राह्मण को लगा कि बौद्ध धम्म से हमें अलग करके हमें गीता के मूर्ख ज्ञान से अवगत करा कर देश में बौद्ध भगवान पैदा होने से रोक लेंगे तो यह मूर्खता से भरी सोच भी ब्राह्मण की नीचता को छुपा नहीं सकेगी। ब्राह्मण हम बौद्धों के ज्ञान के सामने नीच और अदना सा दिखाई देता है। इसी नीचता की सोच को छुपाने के लिए बेचारे ब्राह्मण ने वर्णव्यवस्था का निर्माण किया पर वह भी constitution या संविधान के सामने खत्म हो गई। बेचारा मूर्ख ब्राह्मण अपनी नीच सोच का परिचय किसी ना किसी रूप में देता रहता है। तो ब्राह्मण जात पर अब सिर्फ हंसा ही जा सकता है चूँकि इसके मूर्खतापूर्ण दाव अब खत्म हो चुके हैं और बुद्धि से ब्राह्मण जात बिलकुल गरीब है। अब हमारी परंपरा में बुद्ध ही सत्य हैं।

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