बौद्ध बुद्धि पूजक ब्राह्मण लिंग पूजक, सोच का स्तर

राम कोई ईश्वर नहीं है उसे सिर्फ propoganda कर एक काल्पनिक नाम के साथ प्रचलित कर भगवान की उपाधि दी गई है। राम नाम का कोई पुरातात्विक सबूत हमें प्राप्त नहीं है।
 भगवान शब्द हमारी पाली भाषा का शब्द है और यह बौद्धों के लिए प्रयुक्त शब्द है। इसे ब्राह्मण जात ने चुरा कर नकली मूर्तियों और नकली नामों को प्रचलित कर हमारे बौद्ध सत्य को छुपाया था।पहले हमारे देश में सभी बुद्ध हुआ करते थे सम्मान था,प्रेम था। इस कमीनी जात ब्राह्मण ने छुआछूत जात पात ऊंचनीच इत्यादि पैदा कर बुद्धि पर ग्रहण लगाया था। ये जब सीरिया से हमारे देश में आया था तो लड़ाकू किस्म का था और नीच सोच का था। मन में इतनी नीच सोच लेकर आया था  कि बौद्धों को सम्मान देने के बजाय ये अपनी नकली मूर्तियाँ फैलाने में लग गया और हमारे देश का बंटाधार कर दिया। हम बुद्धि पूजक हैं और ब्राह्मण लिंग पूजक इसी से पता चलता है ब्राह्मण की सोच का स्तर।जहाँ ब्राह्मण वहाँ पाखंडी, जातिवाद, घमंडी, जहाँ बौद्ध वहाँ प्रेम, सद्भावना, बुद्धिमानी। सत्य को चुनना हमारे हाथ है।

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