हमारे बौद्ध स्तूप यानी बुद्धि के स्मारक को महामूर्ख ब्राह्मण लिंग कहता है।

बौद्ध परंपरा विश्व में श्रेष्ठ चूँकि इस परंपरा में हमारे देश में सदियों से मस्तिष्क का विकास होता आया है जिसके फलस्वरूप नालंदा और तक्षशिला जैसी बौद्ध यूनिवर्सिटी बुद्धि के विकास के लिए विश्व के पहले प्रेरणा स्रोत बनें।



इस स्तूप पर तो बुद्ध की फोटो भी बनी हुई है इसे भी बुद्धिहीन ब्राह्मण ने लिंग लिखा हुआ है। ऐसे ही इस कमीने ब्राह्मण ने हमारा इतिहास बदला और धर्म बदला।

इन स्तूपों में पूर्व बौद्धों की अस्थियाँ रखी जाती थीं जिसके रहते ये स्तूप पूजनीय माने जाते थे।
दूसरा ऊपर इंसानी खोपड़ी है जिसका आकार बौद्ध स्तूप से मिलता है। मतलब साफ है बौद्ध लोग बुद्धि को पूजते थे सिर को पूजते थे। इन स्तूपों का छोटा रूप हमारे बौद्ध पूजा करते थे मतलब बुद्धि को नमन है। वहीं नीच सोच के महामूर्ख ब्राह्मण ने इस स्तूप को लिंग कहना शुरू कर दिया।
निम्न स्तर का मानसिक रूप से पूर्णतया विक्षिप्त ब्राह्मण हमारे देश के श्रेष्ठ बौद्ध धम्म को नष्ट कर अपना जातिवादी हिन्दू बनाया और जो श्रेष्ठ बौद्ध वर्ग जो बुद्धि की वजह से विश्व में पूजे जाते थे उन्हें लिंगवाद में फंसा दिया ।
इन महामूर्ख ब्राह्मण को और उसके धर्म को लात मारकर अपनी बुद्धि का विकास करो।
नमो बुद्धाय।

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