ब्राह्मणवाद घ्रणा को बढ़ावा देता है। psychological aspact

आखिर हमारे देश में ego बहुत ज्यादा और विदेशों में development क्यों है।
हमारे देश में एक विदेशी कौम है जो है ब्राह्मण। इस कौम को बचपन से ही यह feedback दिया जाता है तू ऊंच  जाती है तू सबसे ऊंचा है और यह जात आजीवन इसी ego को समाज में फैलाती रहती है। और हर व्यक्ति जिसे इस egoistic विदेशी जात ने नीच वर्ग बनाया वह ऊंचा बनने की सोच में लगा रहता है पर उसके हाथ सिर्फ frustration ही हाथ लगता है क्योंकि वह उस ब्राह्मण के मंदिर इत्यादि में जा रहा है जिसके मन में समाज के समस्त वर्गों के लिए नीचता भरी हो और वह समाज के हर वर्ग को नीचता भरी निगाहों से देखता हो।
 वही जापान जैसे बौद्ध देश में कोई किसी को नीच नहीं मान रहा है। वे बुद्धि को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं और दूसरे की बुद्धि का सम्मान करते हैं। वहाँ पर बुद्धि का विकास हो रहा है और हमारे देश में ego का विकास हो रहा है जो बहुत ज्यादा विस्फोटक है। Ego को पैदा करने वाले विदेशी वर्ग ब्राह्मण ने देश में सिर्फ EGO का व्यापार किया है। हमारे देश में जैसे ही हम ब्राह्मण के बनाए हिन्दू को छोड़कर बौद्ध होकर बौद्ध विपश्यना का लगातार अभ्यास करते हैं हम ब्राह्मण की ego से मुक्त हो कर शांत मन को प्राप्त होते हैं।

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