हमारे देश में scientific invention क्यों नहीं होती?

कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर। जैसे कर्म करेगा वैसे फल देगा भगवान।
कर्म तुम करो फल भगवान देगा या तुम्हारी बुद्धि से फल प्राप्त होगा। भगवान वह व्यक्ति है जो तृष्णा को नष्ट कर दे।पर महामूर्ख ब्राह्मण ने नकली मूर्तियाँ बना कर मनुष्य के भगवान बनने की प्रकिया पर रोक लगाने की मूर्खता की। और गीता को मानव बुद्धि से भी श्रेष्ठ बता दिया कि मंदिर का भगवान ही सबकुछ देगा तुम्हारी बुद्धि कुछ प्राप्त करने लायक ही नहीं है।
                  बुद्धि से जब हम किसी आविष्कार को कर रहे होते हैं तो वह बुद्धि  से एक पूरक रूप हमारे मन में बन जाता है और पूर्ण हो जाता है। अपनी सोच को अपने मन में जैसे जैसे पूर्ण रूप देते जाते हैं वह सत्य के रूप में प्रकट होती जाती है।

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