पहले मन के विचारों को सभी से फ्री करना होगा। फिर शून्य। फिर आप मन की उस अवस्था तक पहुँच जाएंगे जहाँ आप mind body और वातावरण में होने वाली प्रक्रिया को भली भांति देखने व महसूस करने लगोगे।
शुरुआत त्राटक से कर सकते हो
जीवन का सबसे पहला लक्ष्य अपने मन का सत्य पहचानना। मन में कुछ विचार आते हैं इंसान उन की पूर्ति में लगा रहता है। पर वह विचार क्यों आए?
मान लेते हैं वासना मन में आई, तीव्र वासना आई पर वह अपने ही मन में आई कहां से? यह स्वयं की ही सोच है जिसे स्वयं मन से मुक्त किया जा सकता है।
इसका उत्तर अपने मन में स्वयं में जानना बहुत जरूरी है। किसी लड़की के प्रति आकर्षण हुआ। आकर्षण हुआ वह एक मन में आया विचार है पर आकर्षण क्यों हुआ यह एक सत्य है जो मन में स्वयं ही छिपाया है जिसे सच से जाना जा सकता है।जैसे जैसे सच से परिचय प्राप्त होता जाता है मन अपने विचारों से दूसरों को गलत सही की भावनाओं से मुक्त करने लगता है।
विचारों पर विशेष ध्यान दो कुछ विचार आते हैं और लगातार मन को विचलित करते हैं। उन विचारों से मुक्त होने का विशेष मार्ग है समग्र स्वीकार। और अपने विचारों के emotions को watch करने की practice विचारों को कंट्रोल करना सिखाती है। विचार अच्छी और बुरी feel देते हैं। उन्हें observe करने से विचारों को पकड़ना आसान हो जाता है। जैसे जैसे practice बढ़ती है विचार के उत्पन्न होते ही मन उसे पकड़ लेता है। और विचार पकड़ने से मन से बुरा लगने वाले विचारों से root level पर ही मुक्ति पाइ जाती है।
जब भी रिश्तों में उलझन हो मन कहीं उलझा हो मतलब मन या तो past में है या future में। मन के तार के जाल हमेशा past से ही आते हैं। विचलित होने की जरूरत नहीं, तुंरत आनापान करो फिर मन को सीधे दिमाग में लाकर present में विचरण करो।अपनो के लिए प्रेम भाव स्पष्ट करो। हर कार्य के लिए अपने ही विचारों पर अमल करो। नमो बुद्धस्य।
शुरुआत त्राटक से कर सकते हो
जीवन का सबसे पहला लक्ष्य अपने मन का सत्य पहचानना। मन में कुछ विचार आते हैं इंसान उन की पूर्ति में लगा रहता है। पर वह विचार क्यों आए?
मान लेते हैं वासना मन में आई, तीव्र वासना आई पर वह अपने ही मन में आई कहां से? यह स्वयं की ही सोच है जिसे स्वयं मन से मुक्त किया जा सकता है।
इसका उत्तर अपने मन में स्वयं में जानना बहुत जरूरी है। किसी लड़की के प्रति आकर्षण हुआ। आकर्षण हुआ वह एक मन में आया विचार है पर आकर्षण क्यों हुआ यह एक सत्य है जो मन में स्वयं ही छिपाया है जिसे सच से जाना जा सकता है।जैसे जैसे सच से परिचय प्राप्त होता जाता है मन अपने विचारों से दूसरों को गलत सही की भावनाओं से मुक्त करने लगता है।
विचारों पर विशेष ध्यान दो कुछ विचार आते हैं और लगातार मन को विचलित करते हैं। उन विचारों से मुक्त होने का विशेष मार्ग है समग्र स्वीकार। और अपने विचारों के emotions को watch करने की practice विचारों को कंट्रोल करना सिखाती है। विचार अच्छी और बुरी feel देते हैं। उन्हें observe करने से विचारों को पकड़ना आसान हो जाता है। जैसे जैसे practice बढ़ती है विचार के उत्पन्न होते ही मन उसे पकड़ लेता है। और विचार पकड़ने से मन से बुरा लगने वाले विचारों से root level पर ही मुक्ति पाइ जाती है।
जब भी रिश्तों में उलझन हो मन कहीं उलझा हो मतलब मन या तो past में है या future में। मन के तार के जाल हमेशा past से ही आते हैं। विचलित होने की जरूरत नहीं, तुंरत आनापान करो फिर मन को सीधे दिमाग में लाकर present में विचरण करो।अपनो के लिए प्रेम भाव स्पष्ट करो। हर कार्य के लिए अपने ही विचारों पर अमल करो। नमो बुद्धस्य।
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