तर्क है। जब तक देश में लिंग पूजन लगा रहेगा मन वासना की तरफ ही रहेगा। जब बौद्ध देश में बनने शुरू हो जाएंगे बुद्धि का ही विकास होगा। पुरुष स्त्री को उपभोग के बजाय प्रेम के रूप में देखेंगे। मन को कृष्ण बनने पर जोर दिया जाता है तो सिर्फ उपभोग ही करेगा। मन को स्वच्छ करने यानी बौद्ध बनने की प्रक्रिया में लगाया जाएगा तो ही तो बुद्ध प्राप्त होंगे।
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