दीपावली या दीपदानोत्सव प्राचीनतम बौद्ध festival है जिसे लोग बुद्ध के आगमन पर मनाते थे। इस festival का मतलब था आप बुद्ध जैसी पवित्रता और भगवान को अपने घर में स्वागत करते हैं। ऐसी सोच से आपके घर में आने वाला व्यक्ति बुद्ध जैसा pure being ही होगा।
बाद के वर्षों में ब्राह्मण ने चिड़न स्वरूप एक नकली घटिया सा character राम पैदा किया और उस चूतिया से character को स्वागत स्वरूप लोगों के ज़हन में डाल दिया। अब जो लोग इस चूतिया से character के स्वागत स्वरूप दिपावली मनाते हैं उनके घर में लंपट राम जैसे character आते हैं। और जो बुद्ध का स्वागत भाव मन में रखते हैं उनके घर में बुद्ध जैसी भावना वाले लोग आते हैं।
बाद के वर्षों में ब्राह्मण ने चिड़न स्वरूप एक नकली घटिया सा character राम पैदा किया और उस चूतिया से character को स्वागत स्वरूप लोगों के ज़हन में डाल दिया। अब जो लोग इस चूतिया से character के स्वागत स्वरूप दिपावली मनाते हैं उनके घर में लंपट राम जैसे character आते हैं। और जो बुद्ध का स्वागत भाव मन में रखते हैं उनके घर में बुद्ध जैसी भावना वाले लोग आते हैं।
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