राम एक झूठा और नकली character है जिसे कभी timepass के लिए लोगों का मनोरंजक करने के लिए सुनाया जाता था। राम किस प्रकार का विक्षिप्त character था यह ललई सिंह यादव ने सच्ची रामायण में पूरा विषलेषण के साथ लिखा है। अब एक झूठे character को पूजोगे तो आप अपने अंदर झूठ को बढ़ते देखोगे। फिर झूठ बोलोगे तो मन अंदर ही अंदर डरेगा। झूठ को छुपाने के लिए और झूठ बोलोगे और डरोगे। डरोगे तो अपनों पर चिड़चिड़ाहट जताओगे। जितनी चिड़चिड़ाहट होगी उतने ही शरीर में विकार पैदा होने लगेंगे। विकार बड़े होने पर बिमारी का रूप ले लेते हैं। अब इस बिमारी से मुक्ति कौन दिलाएगा। कुछ लोग मूर्ख लिंग पूजक वासना में लिप्त ब्राह्मण के मंदिरों में जाएंगें और मन के भय की वजह से और भगवान भगवान करेंगे। अब वासना में लिप्त ब्राह्मण से क्या मिलेगाऔर वासना में लिप्त मन। अब मन में संतुलन और संतुष्टि कैसे पैदा होगी?
बुद्ध यहीँ से शुरू करते हैं।मन को संपूर्ण सत्यता पर लाना और जितना ब्राह्मण ने मन को विक्षिप्त किया है उसे शून्यता पर लाकर मुक्त करते हैं। इसी से संपूर्णता प्राप्त होती है।
बुद्ध यहीँ से शुरू करते हैं।मन को संपूर्ण सत्यता पर लाना और जितना ब्राह्मण ने मन को विक्षिप्त किया है उसे शून्यता पर लाकर मुक्त करते हैं। इसी से संपूर्णता प्राप्त होती है।
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