हिन्दू, जैन और बुद्ध होने का मतलब:

हिन्दू सबसे निचले दर्जे का मन का आभास है। ब्राह्मण लिंग पूजक है। लिंग के जरिए जागरूक होना सबसे निचले दर्जे का ज्ञान है। इसके जरिए इंसान pleasure की stage को प्राप्त होता है जो कुछ समय तक रहती है फिर नष्ट हो जाती है।इसमें चक्रों की जानकारी हो जाती है और वह मन pleasure को कुछ समय के लिए प्राप्त करता है प्राप्त होता है। हिन्दू धर्म जिसे बाद में सनातन बता कर फैलाया गया ही यूनानी ब्राह्मण का नकली धर्म है।
     जैन मन को बांधने की प्रक्रिया है जिसमें इंद्रियों को वश में किया जाता है। यह ब्राह्मण की प्रक्रिया से ऊपर के स्तर की है। असल में जैनी कौन हैं, जैनी हैं जो उज़्बेकिस्तानी वैश्या यानी मुगल हमारे देश में आए थे यह जैन धर्म उस काल में चमारों की महानता से प्रेरित होकर बनाया गया था। अकबर का दीन ए इलाही ही आज का जैन धर्म है। इसमे इंद्रियों को बांधा जाता है वासना से हटाने के लिए परन्तु इसमें मन बंंधा रहता है और हमेशा चििढ से ओतप्रोत रहता है।  
    परंतु बौद्ध होना विश्व की सबसे बड़ी मन की science है। बुद्ध होने की प्रक्रिया में मन  का जाग्रत होना उच्चतम स्तर की प्रक्रिया है जो बुद्ध हो जाता है वह दुनिया की हर science की प्रक्रिया को साधारण शब्दों में explain कर सकता है। बुद्ध के पास हर सवाल का जवाब है। बुद्ध होने पर speed of thought infinite हो जाती है। यह एक मानसिक स्थिति है जिसे दुनिया में सबसे श्रेष्ठतम माना जाता है जो सिर्फ मूलनिवासी बौद्ध को ही प्राप्त होती है एक परंपरा के अनुसार हमारे बौद्ध इतिहास में बहुत से बुद्ध हुए जिन्होंने अपनी बुद्धि से अलग अलग तरह के मन के सिद्धांतों को दिया। जिससे श्रेष्ठ जीवन जीने के रास्ते उन्होंने प्राप्त किए। हमारा बौद्ध इतिहास इतना श्रेष्ठ है कि पूरी दुनिया के धर्म उससे ही प्रेरित रहे हैं। जैसे पहली शताब्दी में जीज़स के फालोोवर्स ने क्रिस्चियन धर्म की शुरुआत की। असलियत में जीज़स हमारी बौद्ध मोनेस्ट्री में 16 साल बिता कर गए थे( बीबीसी के लिंक गूगल कीजिए), जिसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व में इतना ज्यादा था कि उनके फौलोअर्स ने दुनिया के दूसरे धर्म की स्थापना की। जब सम्राट अशोक के द्वारा पूरे एशिया में बुद्ध बनने की तकनीक को 84000 स्तूपों के रूप में फैलाया गया तो मोहम्मद 30 दिनों तक गुफा में बिता कर आया था। उसके अंदर भी कुछ हिप्नोटिक पावर्स पैदा हुई जिसके प्रभाव से उसने इस्लाम धर्म की स्थापना की। आज ब्राह्मण का नकली धर्म भी इस्लाम की तर्ज पर ही फैलाया गया है। इन्होंने भी सांस रोक कर अपनी इच्छा शक्ति को बढ़ाया और 70 सालों तक हमारे देश पर राज किया। आज भी बौद्ध परंपरा हमारे देश के चमार समुदाय में विद्यमान है। जो भी कबीरपंथी चमार हैं वे उसी बौद्ध परंपरा पर कायम हैं।

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