ब्राह्मण लंपट जात ने हमारे देश के असली धर्म पर कब्जा कर नकली लंपट से देवता मंदिरों में बैठा दिए।
धर्म का पाली भाषा के शब्दों में वास्तविक अर्थ है कर्तव्य। जिस प्रकार पानी का धर्म है प्यास बुझाना उसी प्रकार मनुष्य का धर्म है आपस में प्रेम से रहना। पर लंपट जात ब्राह्मण ने धर्म का स्वरूप ही बदल दिया। अपने को श्रेष्ठ और बाकियो को नीच बनाता वर्ण व्यवस्था का नकलीपन।
इसी प्रकार से भगवान का पाली भाषा में मतलब दिया गया है वह व्यक्ति जो अपने आप को तृष्णा से मुक्त कर लेता है। तृष्णा यानि क्रोध, मोह, भ्रम, चिड़न,रोग इत्यादि से मुक्त मन। परन्तु ब्राह्मण मानसिक अपंग ने अपनी अपंग मानसिक स्थिति में नकली धर्म बना कर अपनी अपंग स्थिति को जगजाहिर किया और नकली भगवान बना कर बौद्धिक छमता को खत्म करने की अपंगता की। इसी मानसिक अपंगता की वजह से सिकंदर की मानसिक अपंग स्थिति में अत्यधिक बिमारी से मौत हुई थी।
धर्म का पाली भाषा के शब्दों में वास्तविक अर्थ है कर्तव्य। जिस प्रकार पानी का धर्म है प्यास बुझाना उसी प्रकार मनुष्य का धर्म है आपस में प्रेम से रहना। पर लंपट जात ब्राह्मण ने धर्म का स्वरूप ही बदल दिया। अपने को श्रेष्ठ और बाकियो को नीच बनाता वर्ण व्यवस्था का नकलीपन।
इसी प्रकार से भगवान का पाली भाषा में मतलब दिया गया है वह व्यक्ति जो अपने आप को तृष्णा से मुक्त कर लेता है। तृष्णा यानि क्रोध, मोह, भ्रम, चिड़न,रोग इत्यादि से मुक्त मन। परन्तु ब्राह्मण मानसिक अपंग ने अपनी अपंग मानसिक स्थिति में नकली धर्म बना कर अपनी अपंग स्थिति को जगजाहिर किया और नकली भगवान बना कर बौद्धिक छमता को खत्म करने की अपंगता की। इसी मानसिक अपंगता की वजह से सिकंदर की मानसिक अपंग स्थिति में अत्यधिक बिमारी से मौत हुई थी।
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