ब्राह्मण और वर्ण व्यवस्था

          ब्राह्मण मानसिक अपंग जात असल में यूनानी

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के समय में सेल्यूकस निकेटर, जो कि सिकंदर का सेनापति था सिकंदर के मरने के बाद भारत में यह युद्ध करने के लिए आया और बुरी तरह से सम्राट चंद्रगुप्त से हार गया। निकेटर के हारने के बाद उसकी हारी हुई सेना को सम्राट चंद्रगुप्त की सेना के साथ मिला दिया गया। उस समय में ये संख्या हजारों में थी। यह सेना घोड़ों पर आई थी और आर्य मानसिक अपंग भी घोड़ों पर ही आए थे। ये सैनिक अपने परिवार साथ नहीं लाए थे और हमेशा ही मौर्यों के अधीन रहे। इन्ही सैनिकों की संतानों में से एक सैनिक दसवें मौर्य राजा ब्रहद्रथ का सेनापति बना जिसने धोखे से ब्रहद्रथ को मार डाला। यही इतिहास में ब्राह्मण मानसिक अपंग जात का पहला राजा पुष्यमित्र शुंग था। इस प्रकार ज्ञात होता है कि ब्राह्मण मानसिक अपंग जात कोई और नहीं यूनान से आई निकेटर की सेना के सैनिक हैं जो हमारे देश में बुरी तरह से हारे थे। ब्राह्मण मानसिक अपंग जात उसी हारी हुई सेना के वंशज़ है जिन्हें हमारे देश ने रहने के लिए जगह दी।
           इसी सेना के सैनिकों ने हमारे देश में रह कर बच्चियों औरतों से बलात्कार कर के ब्राह्मण पैदा किए। दूसरे वर्ण में जिन स्त्रियों को अपनाया नहीं उन बच्चों को रांडो की औलाद कहा, बाद के समयावधि में इन बच्चों के विरोध करने पर और डर कर इन्हें राजपूत कहा और धर्म में इन्हें दोयम दर्जा देकर दूसरा वर्ण बनाया,और जो बच्चे वैश्याओं से पैदा किए थे उन्हें तीसरा वर्ण बना कर वैश्य कहा। इसलिए इन्होंने स्त्रियों को कभी सम्मानजनक निगाहों से नहीं देखा हमेशा वासना रोगी हो कर ही देखा। चौथा शूद्र वर्ण उन लोगों को कहा जिन मौर्यों के वंशजों को इन्होंने नौकरों की तरह रखा। धर्म से बाहर उन्हें अछूत कहा जिनसे ये सबसे ज्यादा डरते थे और जो अपनी बहन बेटियों के रक्षक है। ये ही वो महान बौद्ध है जिनसे ब्राह्मण बहुत डरता है और इनकी बच्चियों से शोषण करने की सोच से ही मानसिक अपंग स्थिति में आ जाता है। इसलिए ही महान बौद्ध कौम को अपने नकली धर्म में अछूत कहा यानि जिन्हें छूने से भी डरता रहा उन्हें चिड़नवश अछूत कह दिया। यही है ब्राह्मण मानसिक अपंग का नकली धर्म और वर्ण व्यवस्था। अगर बुद्धिमानी से देखा जाए तो हमारे देश में सिर्फ दो ही वर्ण बनते हैं एक जो बौद्ध है अत्यधिक बुद्धिजीवी वर्ग जिनके परिवारों में अत्यधिक प्रेम रहता है और दूसरा ब्राह्मण मानसिक अपंग का बनाया नकली धर्म और वर्ण जो ब्राह्मण की चिड़न वाली मानसिक अपंग स्थिति और बलात्कारी धर्म की अपंग स्थिति को ब्राह्मण के मन में प्रेषित करता है।
अब ब्राह्मण मानसिक अपंग जात का नकली धर्म और वर्ण व्यवस्था साफ साफ समझ आ जाती है कि जो बलात्कार से पैदा होंगे वो ब्राह्मण मानसिक अपंग कहलाएंगे। जो रांडो से पैदा होते हैं वो राडपूत या राजपूत और कहा जाए तो क्षत्रिय। और तीसरा वर्ण जो ब्राह्मण मानसिक अपंग ने बनाया वो वैश्याओं से पैदा हुए बच्चे। अब ब्राह्मण मानसिक अपंग के नकली धर्म में बनाई गई वर्णव्यवस्था। अब बाकी जो भी बचे वो इस देश के महान बौद्ध जिन्होंने पूरी दुनिया को कई बुद्ध दिए, मन को असाधारण शक्ति का स्वामी बनाने के लिए विपसना जैसी तकनीक दी, दुनिया को कुंगफू मार्शल आर्ट्स दिए, बाबासाहेब जैसा अद्वितीय विद्वान दिया। अब इस दुनिया की महानम बौद्ध कौम का गर्वित बौद्ध  होकर कौन टुच्चे बलात्कारियों की कौम का या रांडो या वैश्याओं की औलाद कौन कहलाना चाहेगा। ब्राह्मण मानसिक अपंग ने नकली ग्रंथ बनाकर इस सच को छुपाने के लिए नकली धर्म और नकली टुच्चे से भगवान बनाए ताकि झूठ से गर्वित बौद्धों के गौरवशाली इतिहास को छुपाया जा सके। पर सच कभी छुपता है क्या❓

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