ब्राह्मण मानसिक अपंग ने नकली धर्म नकली देवी देवता बनाए वो भी हम मूलनिवासियों के विपरीत, बुद्ध की जगह नकली शिव बनाया वो भी नीले रंग का, चिड़न से भरा, बुद्ध को अपमानित करने के लिए, बौद्ध स्तूपों को लिंग कहकर स्तूपों का अपमान किया, बुद्ध का मतलब दुनिया के हर तृष्णा से मुक्त यहाँ उलटा रूप बनाया नकली धर्म के विदेशी टुच्चों ने, बुद्धि के स्तूपों को लिंग यानि वासना से जोड़ दिया, मूलनिवासियों का अपमान, महाराजा महिषासुर हमारे देश के मूलनिवासी बौद्धों के राजा थे जिन्हें आज भी झारखंड छत्तीसगढ़ में आदिवासी लोग पूजते हैं, एक नकली टुच्ची दुर्गा को उनके साथ जोड़कर उनका अपमान किया, क्या है ये धर्म, मूलनिवासी बौद्धों के इतिहास में से श्रेष्ठ महान राजाओं को मनोवैज्ञानिक रूप से तुच्छ बना कर दिखाना, psychologically मूलनिवासी को किस प्रकार की सोच के साथ नकली धर्म में दिखाना, ये धर्म है क्या? इस हिसाब से तो फूलन को मंदिर में आज देवी के रूप में पूजा जाए और 20 बलात्कारीयों को नीच और टुच्चा दिखाया जाए, महिषासुर की ख्याति को धूमिल करने के लिए चुड़ैल दुर्गा को बनाना, बुद्ध और बौद्ध के विपरीत नकली टुच्चे शिव को बनाना, राजा बलिराज का नकली कहानी रामायण में बाली को छुपकर मारने की कहानी, मनोविज्ञान तौर से श्रैष्ठ बौद्ध मन को चिड़न देने की मानसिक अपंग साजिश, पर समय परिवर्तित हो रहा है, बुद्ध जमीन खोद कर बाहर आ रहे हैं, बाबासाहेब बुद्ध को स्थापित कर गए हैं, गर्वित होइए खुद पर और अपने इतिहास पर
सिंधु घाटी में दो खास प्रकार के अवशेष प्राप्त हुए हैं, एक ग्रेट बाथ या विशाल स्नानागार और दूसरा है ग्रेट हाल या वृहद् कक्ष, अब इसे आज की म्यांमार की बौद्ध पद्धति से जोड़ने से यह ज्ञात होता है कि सिंधु घाटी में भी ग्रेट बाथ में स्नान करने के बाद वहाँ के मूलनिवासी ग्रेट हाल में बैठकर विपसना किया करते थे, एक और खास आकर्षण का केन्द्र है वहाँ से प्राप्त मूर्ति जिन्हें प्रमुख पुजारी कहा जा रहा है जबकि उन्हें बुद्ध कहा जाना चाहिए
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