Chapter 1
देश में राजनीति की नई शुरुआत
आज के परिपेक्ष में देखा जाए
तो आज भारतवर्ष में एक नई सामाजिक संरचना को गठित करने का समय है।
जैसा कि आज ज्ञात है हिंदू कोई धर्म नहीं रहा। बाबासाहेब के अनुसार हिंदू एक कोड बिल था जिसमें भारतवर्ष में पैदा हुए सभी धर्म और संप्रदायों को एक सूत्र करने के लिए सम्मलित किया गया था, परंतु 1950 के बाद एकदम से एक नए धर्म की पैदाइश की गई जिसे नाम दिया गया हिंदू।
यह हिंदू धर्म किसके द्वारा बनाया गया था?
इस धर्म को बनाया था ब्राह्मण नामक एक वर्ग ने, जिनकी भारतीय इतिहास में कोई पहचान नहीं है,ना ही इनकी कोई उपलब्धि है ना ही कोई विशेष महत्व। भारतीय इतिहास में कोई दर्जा ना होने की वजह से,अपने आप को महत्वपूर्ण दिखाने के लिए, मूलनिवासी को मानसिक भ्रम और मूलनिवासियों का असली इतिहास छुपाने के लिए इन्होंने इस नकली धर्म की पृष्ठभूमि तैयार की और इस नकली धर्म की आड़ में हमारे गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों को मनोवैज्ञानिक तौर पर टुच्चता से दिखाया और मूलनिवासियों को मानसिक तौर पर अपने ही महापुरुषों को हीन भावना से देखने की सोच बनाई, इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है कि जैसे अपने ही परिवार के लोगों को चिड़न से देखा जाए और उनमें कमियाँ दिखाई जाएं जिससे अपने ही मन से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को चिड़न से नष्ट कर दिया जाए। इस नकली धर्म को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया और सुप्रीम कोर्ट ने इस नकली धर्म को और उसके देवी देवताओं का चक्र खत्म करते हुए ,डॉ रमेश यशवंत प्रभु बनाम प्रभाकर काशीनाथ कुंते AIR1996SC1113, और मनोहर जोशी बनाम नितिन भाउराव पाटील AIR1996SC796 में हिंदू को धर्म से हटाते हुए सिर्फ जीवन जीने की कला मात्र बोला। यानी वर्ण व्यवस्था बचाने के लिए ऐसा कहा परंतु इन्हें ऐसा नहीं पता था कि कुंठित ब्राह्मण के नकली धर्म के टुच्चेपन को जागृत मूलनिवासी सत्य के रूप में सामने ले आएंगे और नकली धर्म की वजह से सामाजिक बहिष्कार भी कर देंगे जिससे कि वर्ण व्यवस्था उलटी हो जाएगी और ब्राह्मण को ही मानसिक रोगी स्थिति में ला देगी पहले जो हिन्दू धर्म था उसे सुप्रीम कोर्ट ने abolish कर बताया जीवन शैली, तो देश में हिन्दू की जीवन शैली हो जाती है ब्राह्मण ठाकुर वैश्या को बौद्धों का मानसिक गुलाम मानने की जीवन शैली , ठीक अब नकली धर्म खत्म होने के बाद नकली भगवानों को बचाने के लिए एक नए धर्म की आवश्यकता थी तो उसके लिए बनाया गया सनातन धर्म, परन्तु सनातन का जुड़ाव तो बौद्ध परंपरा से जुड़ता है फिर ये नकली टुच्चे से करैक्टर किस धर्म के है? ये टुच्चे से करैक्टर और नकली हिन्दू धर्म कोर्ट में चैलेंज करके खत्म कर दिया गया। अब नकली धर्म की साजिशें कामयाब करने के लिए दूसरा धर्म बनाया गया परंतु अब मूलनिवासी जागृत हो चुके हैं तो सनातन धर्म जो बनाया गया उसका असर हो गया सड़ातन, यानी नकली धर्म हिन्दू से हटाकर सनातन बनाने के लिए ईवीएम हैक करके और बाकी जातियों को यादव और चमारों के विरुद्ध खड़ा करके नरेंद्र मोदी अमित शाह जो की वैश्या वर्ण से था और ईरानी मूल का हिन्दू है को मूल निवासियों के बीच नकली ओबीसी बनाकर सनातन की पृष्ठभूमि तैयार की और जिससे इनके सड़े मन की सोच जग जाहिर हो गई। सड़े मन की वजह से सड़ेतन के विकार साफ-साफ दिखाई देने लगे और इसका सड़ातन असर पर्रिकर ,अटल बिहारी, जेटली, सुषमा पर दिखाई दिया चूंकि झूठ पर नकली धर्म को बचाने के लिए ईवीएम इत्यादि हैक करके सरकार बनाई गई और श्रेष्ठ सरदार मनमोहन सिंह जी को अभद्र टिप्पणी करके इसलिए हटवाया गया चूंकि वे नकली धर्म और ब्राह्मण से जुड़े नहीं थे। देश में एकदम से धन की लूटपाट करने के लिए नोटबंदी जीएसटी इत्यादि करके किनको धनाढ्य करके मानसिक अपंग स्थिति में लाया गया है? अडानी अंबानी को । सरकार बनाई जाती है कि वह देशवासियों का हर हाल में ख्याल रखें, परन्तु यह कैसी सरकार है जो अपने ही देश के लोगों को लाकडाउन के समय में बस ट्रेन इत्यादि की सुविधा देने के बजाय उनसे दुगुने तिगुना पैसा वसूल कर रहे थे और मानसिक रोगी स्थिति में पहुँच रहे थे? ये वही नकली धर्म बनाने वाले लोग हैं हमारे देश में जो मूलनिवासी इतिहास को दबाए हुए बैठे थे। यहाँ पर एक वीर रोहित वेमुला की बात करना भी आवश्यक है, आखिर इस बालक ने ऐसा क्या किया था जो हैदराबाद में क्रांति हो गई। रोहित वेमुला अंबेडकराइट छात्र था और बाबासाहेब पर शोध कर रहा था, इस वीर बालक ने पूरे नकली धर्म और उसके पीछे का नकली इतिहास निकाल कर रख दिया था। इसकी थीसिस हमारे देश में नकली धर्म को फैलाने, उसके पीछे की मानसिक साजिश मूलनिवासियों को अपने ही पूर्वजों से बैर फैलाने की और उनके अंदर डर पैदा करने के लिए ही इस नकली धर्म को बनाया गया था इस बात का पर्दाफाश करती है। जैसे ही इसकी क्रांति शुरू हुई इसे दबाने के लिए जेएनयू की कहानी को उससे बड़ा बना कर दिखाया गया और रोहित वेमुला की शहादत को उसके सामने छोटा किया गया ताकि उसे दबाया जा सके। परंतु रोहित वेमुला की क्रांति देश में नकली धर्म और नकली देशवासी यानि युनानी के चंगुल से देश को मुक्त रखने के लिए ही बनी है।
यह एक प्रकार से शुरुआत है बौद्ध देश में नकली धर्म से मुक्ति की, यानी प्रकृति को सब सच पता है मन में चाहे कुछ भी छुपा हो। प्रकृति सब पढ़ लेती है और मूलनिवासी बौद्ध ही प्रकृति हैं, सिर्फ जरूरत है तो मन को बुद्ध से जोड़ने की, बुद्धि से जोड़ने की। इस बीजेपी सरकार को बनाने के पीछे और सरदार मनमोहन सिंह जी की कांग्रेस सरकार को गिराने के पीछे असली मंशा क्या थी? नकली धर्म को बचाना और एक बहुत ही महत्वपूर्ण सत्य को छुपाना,असल में सरदार मनमोहन सिंह जी की सरकार में रघुराम राजन ने कहा था कि मंदिरों में जितना सोना है उस सोने को आरबीआई में रख दिया जाए तो इससे रुपए की कीमत डॉलर के बराबर हो जाएगी और जो देश पर विदेशी कर्जा है वह बहुत कम रुपये में चुकता हो जाएगा, रघुराम राजन को सरदार मनमोहन सिंह जी की सहमति प्राप्त थी,इसी डर की वजह से नकली धर्म बनाने वाले ब्राह्मणों ने कांग्रेस को हटाने के लिए साजिशें शुरू की ताकि मंदिरों में रखे सोने का लाभ सभी मूल निवासियों को ना मिल जाए और सारा सोना ब्राह्मणों के हाथों से ना निकल जाए और इसलिए भी क्योंकि मूलनिवासी सरदार मनमोहन सिंह जी की सरकार में स्वाभिमानी और धनवान होने लगे थे जो नकली धर्म बनाने वालों की वर्चस्वता को खत्म कर चुका है। इसीलिए हो हल्ला कर के 2जी घोटाले की पटकथा लिख कर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनवाया गया, इसलिए ही नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि देश के धन पर पंजा नहीं पड़ने दूंगा। मनोवैज्ञानिक रूप से वह इशारा कर रहा था कि देश का धन यानी सभी प्राचीन मंदिरों में रखा हुआ सोना जो कि बौद्ध मंदिर है और पंजा यानी कांग्रेसी सरदार मनमोहन सिंह और कांग्रेस का हाथ का निशान, उन बौद्ध मंदिरों के सोने को कांग्रेस के द्वारा आरबीआई में नहीं रखने देगा,परन्तु मन के अंदर छुपी मानसिक अपंग स्थिति यानि कुंठा का शरीर पर असर दिखाई दे जाता है जब शरीर कुलमुलाने लगा जिसके कारण मोदी के द्वारा योगा को खूब प्रचलित किया गया था। आज देश के सभी प्रमुख स्थानों पर कुंठित अयोग्य ब्राह्मणों को बैठाया गया लेटरल एंट्री से ताकि देश के धन को अलग-अलग तरह से लूटने के लिए साजिश की जा सकें, और इसीलिए नोटबंदी जीएसटी इत्यादि लगा कर ज्यादा से ज्यादा धन लूटने और आरबीआई के आपातकालीन फंड से पैसे चुरा सके और ब्राह्मणों को उस पैसे को दे सके, परंतु चोर जो चोरी करता है वह मानसिक रूप से कैसा होता है विक्षिप्त, और चोरी पकड़ी गई तो ब्राह्मण कैसे हो रहे हैं, डर से मानसिक अपंग स्थिति में आ रहे है, इसीलिए नकली धर्म और बीजेपी एकदूसरे को ही मानसिक मनोरोगी स्थिति में लाकर मार रहे हैं और मूलनिवासी इन दोनों को ही समाज से अलग कर रहे हैं, वैचारिक दृष्टिकोण से देखने पर भी ज्ञात होता है कि ब्राह्मणों राजपूतों ने धन तो बहुत लूट लिया पर अब मानसिक मनोरोगी स्थिति में पहुँच कर उस लूटे धन का कोई भी प्रयोग करने की स्थिति से दूर हो गए हैं, ऐसी बिमारियों से ग्रसित हो गये हैं कि जैसे मुकेशअंबानी का बेटा बचपन से ही मधुमेह यानि डाइबिटीज और अस्थमा का मरीज़ है,ना तो उस धन से अच्छे खाने का मजा ले सकते हैं और ना ही मानसिक रूप से स्वस्थ जीवन ही जी सकता हैं,अब बाप ने जो भी धन मूलनिवासियों से लूटा और टैक्स के पैसे से चोरी किया वह उसकी औलादों को ही मानसिक अपंग स्थिति में ला देता है उसी प्रकार से अटल बिहारी ने सरकारी पेंशन तो खत्म कर दी पर खुद पेंशन पर लार टपका टपका कर मरा और
ऐसी स्थिति में जिनके लिए धांधली की उनमें से कोई उसको देखने के लिए फटका तक नहीं, ऊपर से मरने के बाद दो दिन तक लाश और सड़ाई ।इन्होंने बनाया है नकली धर्म, जो झूठ बोलकर मूलनिवासियों के महापुरुषों से चिड़न रखकर खुद ही मानसिक अपंग स्थिति में लार टपका कर मरते हैं और झूठ का धर्म मूलनिवासियों के श्वेत मन पर थोपते हैं, अगर आपके आसपास कोई भी ऐसे नकली धर्म को आप पर थोपता हैं और वो ब्राह्मण या राजपूत ठाकुर है तो तुरंत समझ जाओ ये मानसिक मनोरोगी है और किसी अंदरूनी बिमारी से ग्रसित है उसे बुद्ध की राह दिखाकर चलता कर दो और स्वयं पूर्ण सत्य पर चलते रहो, पूर्ण सत्य की खोज मन में करते रहो और मन को अपनी बुद्धि की शरण में ले जाओ, बुद्ध की शरण में ले जाओ,अपने माता पिता से द्वेष मुक्त रहने के लिए और उन्हें आपका बेहतरीन जीवन प्रदान करने के लिए आजीवन कृतज्ञ रहो ताकि मन हमेशा स्वस्थ रहे,बाकी नकली धर्म का विश्लेषण आगे है
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