सारे धर्मों का जुड़ाव बौद्ध से पैदा

सारी दुनिया के सारे धर्म एक ही मत पर जाकर समाप्त होते हैं और वह है बौद्ध यानि बुद्धि जागृत मत। सिर्फ यही एक मत है जो बुद्धि को पूर्ण सत्यता पर स्थापित करता है।
  हमारे देश की प्राचीन गुफाओं, बौद्ध विहारों इत्यादि से यह तो ज्ञात होता है कि हमारे देश में बुद्धि जागृत करना एक प्राचीनतम परंपरा थी और इसमें अपनी बुद्धि के सत्य को पहचानने के लिए ही और मन पर चिढ़न गुस्सा इत्यादि के भारीपन से मुक्त होने के लिए ही इस परंपरा को अपनाते रहे होंगे। इसी प्रकार से सम्राट अशोक ने भी जब इस भारीपन से मुक्ति पाई होगी तो इस बौद्धत्व को प्राप्त करके ही मक्का मदीना में भी बौद्ध स्तूप बनवाया होगा और इसी को पढ़ कर मोहम्मद ने भी इस्लाम धर्म बनाया होगा, परंतु यह बौद्ध परंपरा नहीं है उसके विपरीत है यह जरूर जान लें। बीबीसी ने अपने स्रोत से जाहिर किया है कि ईसा मसीह ने भी 16 साल बौद्ध विहार में रहकर विपसना की है, इससे ऐसा ज्ञात होता है कि जब ईसा मसीह को क्रूसीफाई किया गया था तो उन्होंने विपसना ज्ञान से ही अपने शरीर को स्वस्थ बना लिया था, चूंकि मन जब शरीर से जुड़ा रहता है तो वह अंदर से ही बहुत तेजी से अपने शरीर के सभी फैक्टर्स को उस जगह पर पहुंचा देता है जिससे घाव बहुत जल्दी भर जाता है। लोगों को यह चमत्कार लगा कि एक आदमी इतनी जल्दी अपने घाव कैसे भर सकता है। परंतु यह हमारे बौद्ध तकनीक में विद्यमान है। इसी को चमत्कार मानते हुए ईसा मसीह के फोलोअर्स ने क्रिस्चियन धर्म की स्थापना की। जब गुरु रैदास साहेब ने  चर्म मांस रक्त को अपनी बुद्धि से जोड़कर चमार की स्थापना की थी तो उस समय में भी गुरु रविदास साहब ने भी मन की इसी तकनीक को प्राप्त किया था। यह बुद्धि से शरीर को स्वस्थ रखने और जोड़ने वाली प्रक्रिया को ही हमारे देश की बौद्ध परंपरा कहते हैं जिसके द्वारा हमारे बौद्ध, मन की बहुत सी ऐसी प्रक्रियाओं को बता कर गए हैं जिसे नालंदा विश्वविद्यालय जैसे विश्वविद्यालयों में बुद्धि स्रोत के रूप में रखा गया था।  ऐसे महान बौद्धों की तकनीक और परंपराओं को नकली धर्म की आड़ में छुपाने की साज़िश की गई हमारे बौद्ध देश में।
    बौद्ध परंपरा में अपने मन में उठती हुई तृष्णा को पहचान कर मन में ही भंग कर भंगी बनने की प्रक्रिया को बल मिलता था। ऐसे विद्वानी जो भंगी बन जाते होंगे वे अपनी बुद्धि के बल से शरीर में होने वाली सारी प्रक्रियाओं को पहचान कर उनका विवरण किताबों के रूप में देते होंगे चूंकि सारा नालंदा विश्वविद्यालय पांच मंजिला इमारत के रूप में स्थापित था और वहां इतना बुद्धि संग्रह था जिसे जलाए जाने पर महीनों तक वह जलता रहा था। बौद्धत्व में बुद्धि इतनी शक्तिशाली हो जाती है कि वह प्रकृति के रहस्यों को भी उजागर करने लगती है, और प्रकृति से बुद्धि को जोड़कर उसको भी अपने अनुरूप ढाल सकती है।
इस विवरण से यह तो स्पष्ट है कि हमारे देश के महान पूर्वज पूरी दुनिया में सबसे बुद्धिमान हैं और उन्होंने ही बुद्धि जागृत करने के बहुत से रास्ते दिए जिसमें अपनी सांस को पहचानने का रास्ता विपसना के रूप में स्थापित हुआ जो विपस्सी बुद्ध के द्वारा दी गई तकनीक होगी ।अब बात करते हैं भगवान शब्द के अर्थ की जो विवरण पाली भाषा में दिया गया है। इसका असली अर्थ था भग्ग वान, यानि वह बौद्ध जो अपनी बुद्धि से  वान यानि अपने मन में उठती हुई चिढ़ गुस्सा इत्यादि भावनाओं को पहचान कर भंग कर दें। जब भग्ग का मतलब भंग करना होता है तो भग्ग का मतलब योनि और वान का मतलब चालक  ऐसा बताने वाला हमारे देश में इस सच्चाई को छुपाने वाला कौन आ गया। असल में मोहम्मद ने जब विपसना की होगी और वह गुफा में कुछ समय बिता कर आया होगा तो उसके मन ने उसकी अधूरी इच्छाओं को जगा दिया होगा और वह बंधन के रूप में उसके मन पर हावी हो गया होगा ।  इसका असर हमारे देश में नकली धर्म की वजह से भी बनाया गया है। नकली धर्म की आड़ में ब्राह्मण मोहम्मद को ही फैला रहा था जिसका असर हमारे देश में और बहुत से मोहम्मद का बनना था। इसीलिए  नकली धर्म में भगवान शब्द का अनर्थ करके फैलाया गया था और हमारे देश की बुद्धि से श्रेष्ठ बौद्ध परंपराओं को गायब किया गया था। इसीलिए हमारे देश में जो दुनिया की सबसे श्रेष्ठ बौद्ध उपाधियां, जैसे भंगी ,चमार  इत्यादि जैसी परंपरागत शब्दावली है उनको जाति बता कर प्रचारित किया गया और विदेशी मूल की कौम ने नकली धर्म की आड़ में ऊंचा नीचा जैसा बताकर प्रचारित किया ताकि श्रेष्ठ बौद्ध को अपनी श्रेष्ठ परंपराओं का आभास ना हो और उन्हें अपनी श्रेष्ठता के बजाए हीन भावना को पैदा किया जा सके, जैसे हमारे देश की भंगी उपाधि वाले श्रेष्ठ बौद्धों को नकली धर्म की आड़ में वाल्मीकि कौम बता कर फैलाया गया। महान भंगी शब्द के प्रति चिढ़न फैलाई गई। जो भगवान शब्द से संबोधित कौम है, जो कभी मन की भंग अवस्था को प्राप्त करते होंगे श्रेष्ठ बौद्ध उपाधि को प्राप्त होंगे उनके साथ नकली धर्म की आड़ में मानसिक दुराचार किया गया। यह हमारे देश के मूलनिवासी बहुजन के प्रति  विदेशी कौम की क्रिमिनल कौन्सपिरेसी करार दिया जाएगा। चूंकि नकली धर्म से जो नाकाबिल हैं उन्हें वरीयता दी गई और जो श्रेष्ठ हैं उनके ऊपर नकली धर्म की आड़ में मानसिक दुराचार किया गया। टैलिपैथी मन की प्रक्रिया है जो दिखाई नहीं देती परन्तु नकली धर्म के द्वारा यह इस प्रकार थोपी गई जिससे श्रेष्ठ को हीन भावना थोपी गई। बहुत गहराई है मन के भीतर परन्तु अगर मन के भीतर जाने की प्रक्रिया को ही नहीं कर रहे हैं तो नकली धर्म का दुराचार जो दुर्भावना के साथ थोप दिया गया वही तो बुद्धि पर हावी होगा। हमारे देश में इसीलिए कोई भी इन्वैंशन डिस्कवरी नहीं हुई है 70 सालों में, जो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बुद्धि को लेकर पैदा हुए हैं वो हीन हैं नीच हैं उनके साथ मानसिक दुराचार किया गया नकली धर्म की आड़ में और वो नकली धर्म आज भी देशवासियों की श्रेष्ठ बुद्धि पर थोपा हुआ है, और जो साजिश करने वाले हैं मानसिकता से हीन हैं उन्हें वरीयता दी गई। हमारे देश की किसी भी विश्वविद्यालय की श्रेणी दुनिया में शीर्ष 100 में भी नहीं है ऐसा क्यों? चूंकि यहां शीर्ष पर उनको थोपा जा रहा है जो इस लायक ही नहीं है कि  वो विश्वविद्यालयों में श्रेष्ठ बुद्धि का विकास कर सकें। वो सिर्फ अपनी  हीन भावना दूसरों पर थोप कर अपने आप को श्रेष्ठ बताए घूमते हैं।

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