Chapter VIII
भारतीय इतिहास, सिंधु घाटी की सभ्यता और बौद्धत्व दुनिया की सबसे महान संस्कृति है जिसका असर पूरे एशिया में दिखाई देता है। जापान में अशोक के द्वारा अपने पुत्र को भेजने से वहाँ के सामाजिक माहौल में भगवान बुद्ध की छाप साफ दिखाई देती है। सिंधु घाटी की सभ्यता में बौद्ध छाप वृहद स्नानागार और वृहद हाल से भी साफ़ झलकती है। सभी सिंधु घाटी सभ्यता के मूलवासी वृहद स्नानागार में स्नान करके वृहद हाल में विपसना इत्यादि किया करते थे ऐसा आज प्रमाणित होता है ।
वृहद स्नानागार जिसे साभार विकिपीडिया से प्राप्त किया
इसे आज के म्यांमार में गुरु शिष्य वाली बुद्ध परंपरा से जोड़ कर आसानी से समझा जा सकता है। बौद्ध से ही इस्लाम धर्म की भी पैदाइश है ऐसा जाना जा सकता है।
प्राचीन मक्का मदीना में स्थित बौद्ध स्तूप, साभार यूट्यूब से प्राप्त
जब सम्राट अशोक ने 84000 बौद्ध स्तूप बनवाए थे तो मक्का मदीना में भी एक स्तूप मौजूद है जो उसी काल का होगा और उसपर बुद्ध बनने की प्रक्रिया भी पाली प्राकृत भाषा में अंकित होगी। मोहम्मद और बाकी नबी ने भी उसी स्तूप और शिलालेख से पढ़ विपसना कर इस्लाम धर्म की स्थापना की पर मोहम्मद बुद्ध नहीं बन पाया और बाकी नबी भी कुछ बौद्धत्व प्राप्त किए होंगे ऐसा स्पष्ट होता है। चूंकि बुद्ध ने बुद्धि के मनोवैज्ञानिक सूत्र दिए हैं। वैसे हमारे देश में आज दो मुस्लिम कौम हैं एक वो जो मुगलों और गुलाम वंश की फौज के रूप में हमारे देश में आए और एक दूसरी मुस्लिम बिरादरी वो है जो देश के मूलनिवासी बौद्ध थे बाद में मुस्लिम बने होंगे । जो गुलाम वंश ईरानियों के आज के वंशज हैं वे युनानी के साथ आज भी शादियां कर रहे हैं जैसे शाहनवाज हुसैन ब्राह्मण युनानी हिन्दू लड़की जोशी से शादी करके बीजेपी से जुड़ा है। बाकी जो भारतीय मूल के बौद्ध थे उन्हें निचले स्तर का मुसलमान बनाया गया है यानि यहाँ भी धर्म की आड़ में नकली वर्णवाद बनाया गया है। इसी प्रकार मुगल काल में भारत में आए उज़्बेकिस्तानी जिन्होंने जैन धर्म बनाया। जैन धर्म को बनाने वाले मुगल जो मध्यकालीन भारत में आए और उसे भी प्राचीन बताकर सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के साथ चिपकाया गया है ताकि इसे बौद्ध से प्राचीन दिखाया जा सके। जैनियों का मुगल से जुड़ाव इस प्रकार दर्शाया जा सकता है इतिहास की किताबों में और मोहम्मद शाह मुगल है आज हमारे देश में जैनी हैं उनका शाह सरनेम जैन होने से जोड़ता है। तो जैन धर्म कब बनाया गया है? इस प्रकार से यह भी शोध का विषय है। हमारे देश में इसी तरह नकली धर्म और टुच्चे इतिहास को घुसेड़ा गया है ताकि महान बौद्धों को अपनी महानता से और गर्वित इतिहास से परिचित होने से अगला बाबासाहेब होने से रोककर नकली धर्मों के भ्रम में फंसाया जा सके।
हमारे देश में सुकिति बुद्ध के पहले बहुत से बुद्ध हुए हैं। हमारे देश में बुद्ध बनने की परंपरा सिंधु घाटी से चली आ रही थी इसी परंपरा को 1950 के बाद हिन्दू ब्राह्मण के द्वारा नकली धर्म के साथ अवतारवाद करके हमारी मूल परंपरा को नष्ट कर छुपाया गया था। हमारे देश की मूल परंपरा में बुद्ध होने के खास पहलू थे।
बुद्ध एक संपूर्ण सत्य के ज्ञाता को माना जाता है, यानि अपने शरीर में जो भी प्रक्रियाएं हो रही है उनका संपूर्ण ज्ञान होना और स्वयं की बुद्धि को इसका अहसास प्राप्त होना ही बुद्ध होना है । जो बुद्ध हो जाता है वह प्रकृति के हर सत्य से वाकिफ होता है हर मन को पढ़ सकता है उस मन पर अपने सत्य को स्थापित कर सकता है। सिंधु घाटी सभ्यता के धम्म चक्र में छ आरे हैं, यानि सिंधु घाटी के बौद्धों ने बुद्धि के छह सूत्र दिए थे और उसमें दो आरे सुकिति बुद्ध के द्वारा जोड़े गए है। गौतम यानि सुकिति बुद्ध ने दो सूत्र दिये थे जिसमें एक था लोट्स सूत्र और दूसरा था कारण और असर(cause and effect)। आज हमारे तिरंगे के बीच में जो धम्म चक्र है उसमें 24 आरे हैं। यानि गौतम बुद्ध के बाद के बौद्ध आचार्यों ने भी बहुत कुछ दिया देश को अपनी बुद्धि से प्राप्त ज्ञान से। यही सम्राट अशोक के काल तक पहुंचते पहुंचते 24 आरों के धम्म चक्र में परिवर्तित हो गया था। यानि उस समय तक 24 सूत्र मानसिक रूप से जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए दिए जा चुके थे। बौद्ध देश में हर कोई जागृत अवस्था में रहता है जिसे अपने मन में आता हुआ हर कारण पता होता है। मन के अंदर क्या चल रहा है, वह विचार मन में क्यों आया कहां से आया उसका मन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, उसे जड़ से (माता-पिता के मन से जुड़े वान यानि तृष्णा) ही पकड़ कर खत्म या भंग करना ही जागृत अवस्था है। जागृत अवस्था में डर चिढ़ द्वेष इत्यादि के पैदा होने का कारण पता होता है। साधारण रूप में जब मन में डर आता है तो साधारणतया उसे साहस से दबाया जाता है। यह डर के सत्य को दबाना हुआ जिसमें जब डर से उबरकर साहस को दिखाएगा तो वह चिढ़न और गुस्से का रूप होगा और वह अपने ही परिवार से चिढ़ के रूप में उभर कर आएगा। परन्तु बौद्धत्व के अनुसार डर तृष्णा यानि वान का रूप है और यह बालक मन में बचपन में पैदा हुई किसी घटना से संबंधित है। उस घटना का मन में स्वयं से ढूंढने पर उसकी जड़ तक पहुंच कर उस घटना से संबंधित डर को या तो माता-पिता को सच्चाई बताकर साहसी बना जाता है और दूसरे तरीके से मन से डर के कारण को जो कि माता-पिता से जुड़ा हुआ है को भंग करके भंगी यानि भगवान बना जाता है। यूनानी हिन्दू ब्राह्मण ने जो नकली धर्म बनाया था उसमें हमारे महान बौद्ध विचारधारा के बिल्कुल विपरीत नकली टुच्चे से भगवान बना कर भगवान की बौद्ध मूलनिवासी छवि को खराब करके पेश किया गया है।
दुनिया के सबसे बुद्धिमान भगवान गौतम बुद्ध के गणपति शब्द को नकली टुच्चे से करैक्टर गणेश जो कि हाथी के सिर वाला है को जोड़ कर दुनिया की सबसे बुद्धिमान कौम के महान वंशज के नाम का प्रयोग ऐसे करैक्टर के लिए किया गया, ऐसा क्यों किया गया? इस नकली धर्म की आड़ में देश की महान बौद्ध कौम के विद्वता और उनकी महानता के खिलाफ यह मनोवैज्ञानिक अपराधीकरण फैलाना माना जाता है। जिससे इस विद्वान कौम की मानसिकता में हीनता को पैदा किया गया और नकली धर्म से इनके खिलाफ और इनकी श्रेष्ठ बुद्धि के खिलाफ टुच्चता फैलाकर उनकी प्राचीन बौद्ध बुद्धि में नकली धर्म की छवि फैलाई गई। इस नकली धर्म की आड़ में महान बौद्धों के बुद्धि, धन और संपन्न होने के विकास को रोका गया और नकली धर्म से उनके मन पर विद्वेष डालने की मानसिक अपंग साजिश भी की गई विदेशी कौम के द्वारा। इस नकली धर्म की वजह से मूलनिवासियों के मानसिक विकास को रोककर और सिर्फ विदेशी कौम को फायदा देकर बहुत बड़ा अपराध किया गया है। इस अपराध का खामियाजा देश के सारे हिन्दू ब्राह्मण और ईरानी हिन्दू वैश्या ठाकुर से वसूला जाएगा जो सामाजिक मानसिक और आर्थिक नुक्सान नकली धर्म के द्वारा दिया गया है। उसकी पूरी भरपाई नकली धर्म वाले हिन्दू की सारे मंदिरों को और उनकी संपत्ति को जो कि प्राचीन बौद्ध विरासत है को मूलनिवासी बौद्धों को अपने अधिकार में लिए जाने से किया जाना है।
नकली धर्म में दो करैक्टरों का विसर्जन करते हैं, एक टुच्ची सी करैक्टर दुर्गा की जिसको महान बौद्ध सम्राट महिषासुर से जोड़ कर दिखाया गया है।जो बंगाल में विसर्जन होता है वह हमारे इतिहास का ही विकृतिकरण है। दूसरा महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन, इस हाथी के सिर वाले करैक्टर को भगवान बुद्ध के नाम को देकर ब्राह्मण सड़ातन स्थिति के शीर्ष पर पहुंचा है। जैसे ही बाबासाहेब आंबेडकर जी ने देश के मूलनिवासियों को बौद्ध बनाया वैसे ही मानसिक टुच्च स्थिति में नकली धर्म की स्थापना की जाने लगी। महान बौद्धों के बीच में नकली धर्म वाले अपने को बहुत कुंठित अवस्था में देखते रहते हैं और इसीलिए झूठ बोल कर नकली धर्म से मानसिक टुच्च स्थिति में पहुंचे हैं जिसका परिणाम बीजेपी सरकार के रूप में जेटली सुषमा पर्रिकर अटल की मानसिक स्थिति के रूप में हिन्दू ब्राह्मण पर दिखाई दिया है।
हमारी बौद्ध परंपरा में भगवान बनना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसे रैदास साहब गुरु नानक साहब और कबीर साहेब की परंपरा से भी समझा जा सकता है। जैसे मां के मन में किसी प्रकार की बचपन की चिढ़न है, उसने चिढ़न से पैदा डर को अपनी ही संतान को किसी डर के अनुभव से आगे दे दिया।इसी प्रकार जिन माता-पिता के विचारों में मतभेद ज्यादा होता है उनके संतानों में एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक उलझन रहती है। ऐसा बच्चा मन से सुलझा हुआ नहीं होता है। ऐसे माता-पिता को अपने मन को एक दूसरे से पूर्ण संतुष्टि पर जोड़ना आवश्यक होता है जिससे बच्चे का मन संपूर्णता प्राप्त करें। इस प्रकार नकली धर्म के द्वारा इस्लामीकरण से जोड़ कर हमारी महान बौद्ध सभ्यता में राग द्वेष की स्थिति को हिन्दू ब्राह्मण ने स्वयं की मानसिक टुच्चता को झूठ बोलकर नकली धर्म से जानबूझकर देश को दिया गया या फैलाया गया। नकली धर्म और टुच्चे से नीले रंग के चिड़चिड़े भंगेड़ी करैक्टर को भगवान बना पिता के लिए ऐसा अनुभव बदला गया। राम एक ऐसा करैक्टर है जो मूलनिवासियों के लिए विलेन वाला रूप है। राम के नाम का प्रयोग कर हमारे देश में इस प्रकार से दर्शाया गया कि वह शुंग है, जो चोर है मानसिक चिढ़न का मरीज़ है जिसने मूलनिवासी बौद्ध मौर्य राजा का वध किया उस विलेन करैक्टर को भगवान बता कर पूरे देश में फैलाया गया। ऐसे विलेन को भगवान बताने वाले हिन्दू ब्राह्मण की मानसिक स्थिति चिढ़न की किस टुच्चता के स्तर पर होगी समझा जा सकता है। हमारे देश में बुद्ध होने का अनुभव माता-पिता होने का अनुभव है। नकली धर्म का मानसिक नजरिया जो राग द्वेष मां के मन से अपनी संतान को मिला वह उसे आगे अपनी संतान को देगी जब तक वह स्वयं जागृत हो कर इस राग द्वेष को स्वयं के मन से भंग कर भंगी ना हो जाए। यही है हमारी महान बौद्ध सभ्यता जो सर्वश्रेष्ठ बुद्धि के पूर्ण सत्य को प्राप्त हो कर राग द्वेष मुक्त समाज का निर्माण करती हैं जिसे पुनः स्थापित कर देश के महान बौद्ध वंशजों को दुनिया के सबसे बुद्धिमान होने का गर्व महसूस हो और विद्वेष फैलाने वाले नकली धर्म वालों के नकली करैक्टरों से देश को और मूलनिवासियों के मन को मुक्त महसूस कराया जाए।
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