संवेदना को साक्षी भाव से देखते रहने से संवेदना चली जाती है सैक्स की संवेदना किसी स्त्री के प्रति ही उठती हैं और वे सिर्फ तभी उठती हैं जब मन में संभोग के प्रति आकर्षण हो। यह आकर्षण किस उम्र में सबसे पहलीबार पैदा हुआ उस पहले विचार को साक्षी भाव से समझ लेने पर वह भाव ही जाता रहेगा तो संभोग तो बौद्धत्व के लिए जरूरी नहीं पर स्त्री के मन से जुड़े प्रेम के लिए जरूरी है और दोनों अलग हैं।
Duality of mind
मन में दो विचार होते हैं एक जो हम करना चाहते हैं और एक पीछे से उसके विपरीत आवाज आती है। जो विपरीत आवाज आती है उस पर ज्यादा ध्यान दें कर सुनेंगे तो वह बहुत पुरानी सोच से पैदा हुआ विचार है जिसकी वजह से कार्य संपन्न नहीं होता है। इसके लिए उस आवाज को स्वीकार कर के खत्म करने से सिर्फ एक ही विचार मन में होता है जो हमारा आज का मन कहता है और वह संपन्न होता है।
बचपन में जिस भी चीज़ का अभाव होता है, बड़े होने पर इंसान उसी अभाव को पूरा करता है,और वह अभाव सिर्फ एक अहसास है, जैसे ही उस अहसास को पूरा करते हैं या किसी के उस अहसास को पूरा करने में मदद करते हैं, वह अहसास पूर्ण हो जाता है
My invention,
अपने मन को सदैव दिमाग में रखें और सबसे ज्यादा बिलकुल top पर, मन को दिमाग का सच जानने के लिए लगाए रखें, बहुत से चमत्कार सामने आएंगे, और मन हमेशा खुश रहेगा
My truth of mind
Quanta of energy has been used to produce a thought in mind, mind works and it's working is based on energy, definitely thought can also travel from one mind to other, emotions can be felt through one brain to other and they have been produced subconsciously, so subconscious thought can also be transfer
मन से पूर्ण सत्य जानने का तरीका
तो मन को अपनी सिर में लेजाकर दुख का सच जानना था फिर उस कारण को स्वीकार कर उसके पीछे जाना था, जैसे onion peel होती है तब तक खोजना है जब तक सच्चाई से पूरा मन साफ हो जाए जैसे प्याज के बीच वाला भाग बिलकुल साफ होता है
Nothing negative nor positive it's an action and reactions of your teachings since childhood, real peace of mind is finding truth of mind which creates reactions, ultimate truth is Buddha
Mind connect sanskar of other in buddhism our mind connect with that sanskaar and give a practice to watch... Continue watching disappear that sanskar.... हमारे मन में लोगों के लिए किसी प्रकार की कोई feeling attach होती है। वह negative feelings या चिड़न दूसरे की तरफ से आ रही है और body में कुछ विकार के रूप में दिखाई दे रही है। जब उस विकार को continuous watch करते हैं तो धीरे धीरे वह विकार disappear होता जाता है। और उधर जहाँ से वह विकार आ रहा था उनकी feeling मन से विकार के रूप में dissolve हो जाती है।
बौद्ध भाव के according हम अपने मन में दूसरे के लिए कुछ संभावना पैदा करते हैं। वह संभावना हमारे मन से दूसरे के साथ connect करती है
Dis+ ease जब मन का चैन disturb हो जाए वही है disease.... How to keep your self happy? When mind is towards unsatisfied expectations ask yourself where I am unauthentic? Your mind reaches you to your Unsatisfying Unauthanticity... Now Complete the incomplete conversations... You become free... In simple terms complete the incomplete expectations from your mind... Other ways is to do vipasna connect your mind within and disconnect your mind with the unfulfilled expectations with the outside world...
विपसना करो चूंकि मन प्रकृति के साथ जुड़ सकता है महसूस कर सकता है। किसी पेड़ को आलिंगन करो तो जागृत अवस्था में उसकी energy को महसूस किया जा सकता है। एक सांइस बाहरी खोज है एक सांइस भीतरी खोज है। यही बुद्ध है यही बौद्धत्व है।
Pain: thoughts around and stories
Enquiry your self.. First 13 thoughts
Pain in mind or in body...
Bundle of thoughts around one thinking and stories.... एक बात पर विचार अटका और उसके आसपास stories बनानी शुरू हुई। वो stories deep expectations के साथ मिलकर कहानियों में unsatisfactions बनाने लगते हैं और वह thoughts cluster of desire या rackets के रूप में आने लगता है वही चिड़न का रूप दूसरे के लिए हमारे प्यार को रोकता है और बिना प्यार के हमारे सर में या शरीर में दर्द या किसी और विकार के रूप में उठ कर आता है। यह unsatisfactions कहीं ना कहीं हमारे rootrelationship यानि माता पिता से जुड़ा होता है।
cure: सबसे पहले जिनके लिए मन में चिड़न आ रही है उन्हें मन से माफ करना।
अब अपने माता पिता से मन ही मन माफी मांगना और उनके प्यार को महसूस करना।
अब दूसरे से चिड़ने के लिए अपने मन से माफी मांगना अपने ही मन को चिड़न से परेशान करने के लिए और अपने प्रेम को पूर्णतः अपने आप में महसूस करना।
यह विश्वास से बोलना शुरू करो ब्राह्मण ठाकुर वैश्या= हिन्दू यानि काले गुलाम बाकी सब बौद्ध यानि बुद्धिमान। अपना मन खुश और संतुष्ट रखो।बुद्धिमान मानकर आपका मन खुश। ब्राह्मण ने ऊंच नीच बना कर हमारे मन में चिड़न का भाव दिया ऐसा बोलकर मानसिक विकलांग जात की ऊंच नीच वाली चिड़न उसी के पास और हमारा मन खुश। रोजाना कम से कम दस लोगों को ये बात शेयर करो। थोड़े ही समय में असर भी दिखाई देने लगा है।
जो लोग कहते हैं समय की कद्र कीजिये, समय की नहीं अपने आप की, अपने मन की कद्र कीजिये समय आपकी कद्र करता दिखाई देता है। बुद्ध की कद्र दुनिया में है।
Buddhist phrase
Breathing in,
I calm my body.
Breathing out,
I calm my mind.
In reality or real world there is no fear
यह भारत देश की प्राचीनतम तकनीक है जिसे करके स्वयं भगवान बना जाता है। इस तकनीक के द्वारा मन को इतना विकसित और जाग्रत किया जाता है जिससे कि मन से पूरे शरीर के विज्ञान को पहचाना जाता है और उसे पूर्णतः जाग्रत करके मन को प्रेम युक्त कर चिड़न, गुस्से से, द्वेष इत्यादि से मुक्ति मिलती है।
As an oldest techniques of India vipassyana creates a person a God of his/ her own life. This technique developes conscious of mind and open up science of body to the brain. This technique keeps the mind fully in love and being free from anger, anxiety, restlessness etc.
Unauthentic -suffering is there
Authenticity leads to freedom from suffering and fulfillment of life
Buddhism is body mind relationship
Your mind and body have all the science of this universe. Your mind Identifies the body secret and that is a universe principle... The real science....
How to read or become aware of these principles?
The very simple process is making the mind thought free or comes to nothing.
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