लोट्स सूत्र में भगवान बुद्ध ने energy wave का जुड़ाव मां के पेट से जुड़ा हुआ दर्शाया है। बालक अपनी मां से खाना यानि ऊर्जा को ग्रहण करता है। यानि नाभि का जुड़ाव मां से जुड़ा हुआ होने की वजह से ऊर्जा को लेता है, परन्तु मन पर बैठी तृष्णा यानि वैचारिक दृष्टिकोण में बैठी चिढ़ गुस्सा डर इत्यादि उस ऊर्जा को नष्ट करता है। जहां अपनी मां के प्रति मन में ईर्ष्या इत्यादि यानि वान बैठ जाता है तो वह अपने ही मन को मां के प्रति आने वाली ऊर्जा को नष्ट करता है। ऐसे में जो भी बालक मां पिता के द्वारा जागृत अवस्था में नहीं रहता है वह अपने ही घर में अपनी बुद्धि में श्रेष्ठ एवं स्थिर नहीं रह जाता और पढ़ाई-लिखाई में मन की श्रेष्ठतम अवस्था को प्राप्त नहीं कर पाता है। जो माता-पिता स्वयं जागृत अवस्था में रहते हैं उनके अपने बालक के मन में भी जागृत अवस्था को ही प्राप्त होते हुए भी देखते जाते हैं।
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