Chapter I
देश में बौद्धों के स्वाभिमान की नई शुरुआत
इस पुस्तक के द्वारा भारत देश के राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाओं के विश्लेषण जो आज सोशल मीडिया पर बहुत प्रचलित हो रही हैं पर एक बौद्धिक मूलनिवासी की नजर से देखा गया दृष्टिकोण है। इस तरह की सुनी सुनाई बातों के पीछे छुपा रहस्य को उजागर करते हुए बहुत से मनोवैज्ञानिक प्रभाव को जो देश के नागरिकों पर पड़ते हुए देखा गया है उसके कुछ मनोवैज्ञानिक समाधान ढूंढने की पहल कही जा सकती है हमारे देश में बहुत से सवाल और वैचारिक दृष्टिकोण देखे जा सकते हैं जिनके द्वारा नकली धर्म की पृष्ठभूमि तैयार की गई थी (इतिहास में एनसीईआरटी की पुरानी पुस्तकों में दिया गया विश्लेषण) जो कि ऐतिहासिक जानकारी के अभाव में लिखे गए, मनुस्मृति की वर्णव्यवस्था का मनोवैज्ञानिक टुच्चापन, नकली धर्म उसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव किस के मन पर किस रूप में थोपा गया, गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा फैलाया गया झूठ और फिर झूठ से प्रचारित करैक्टरों के पीछे का मनोवैज्ञानिक विद्वेष इत्यादि ऐसे बहुत से सवाल हैं जो नकली धर्म की आड़ में थोपे गए, शब्दावली के रहस्य, उनका गठन, मनोवैज्ञानिक प्रभाव इत्यादि ऐसे सवालों के कुछ मनोवैज्ञानिक जवाब खोजने का कार्य इस पुस्तक के द्वारा किया गया है। 2014 के बाद से राजनीतिक बदलाव, कानूनों में फेरबदल इत्यादि को देखकर ऐसा माना जाने लगा है कि यह जिनकी सरकार है उनका देशवासियों से कोई जुड़ाव नहीं है। उनका जुड़ाव एक ऐसे वर्ग से जुड़ा हुआ है जो हमारे देश में बाहर से आए हुए हैं और नकली धर्म बना कर देश में विदेशी बनाम स्वदेशी नामक दो वर्ग पैदा कर वर्ण-व्यवस्था ही बना दी गई। बहुत से अनसुलझे सवाल, व्यवस्था और धर्म को देखते हुए पैदा होते हैं जिनका मनोवैज्ञानिक प्रभाव देश के हर नागरिक पर पड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में देश के हर एक नागरिक को उन सच्चाइयों से अवगत होना चाहिए जिनका प्रभाव हर नागरिक पर पड़ा है और पड़ रहा है।
आज के परिपेक्ष में देखा जाए
तो आज भारतवर्ष में एक नई सामाजिक संरचना को ने तरीके से मूलनिवासी बौद्ध इतिहास के तहत गठित करने का समय है।
जैसा कि आज ज्ञात है हिंदू कोई धर्म नहीं है। हिंदू 1950 में दिया गया व्यक्तिगत(personal) कानून था जिसमें भारतवर्ष में पैदा हुए सभी धर्म और संप्रदायों के एक सूत्र करने के लिए सम्मिलित किया गया था, परंतु इस के बाद एकदम से चिढ़न वश एक नए धर्म की पैदाइश की गई जिसे नाम दिया गया हिंदू । जब बाबासाहेब आंबेडकर जी ने 1950 के बाद बौद्ध धम्म की स्थापना की तो एक नए नकली धर्म की स्थापना की जाने लगी जो बौद्धत्व के बिल्कुल ही विपरीत बनाया गया था। यह मनोवैज्ञानिक रूप में मूलनिवासी बौद्ध (एससी एसटी और असली ओबीसी) की बुद्धि को फंसाने के लिए नकली धर्म बनाया गया था जिसमें मूलनिवासियों की श्रेष्ठतम बुद्धि पर अपनी कुंठा को नकली धर्म की आड़ में थोपा गया था वहीं था हिन्दू।
यह हिंदू धर्म किसके द्वारा बनाया गया था?
इस धर्म को बनाया था हिन्दू ब्राह्मण नामक एक वर्ग ने ईरानी उज्बेकी हिन्दू ठाकुर वैश्या के साथ मिलकर और दो धर्मों की कहानी हमारे देश में बनाई गई, जिसमें एक मुस्लिम और दूसरा हिन्दू( यानि इस्लामीकरण) बनाकर पेश किया गया जबकि जो हिन्दू है और हिन्दू धर्म का संस्थापक है वह खुद हिन्दू ब्राह्मण है जो इस्लाम को ही मनोवैज्ञानिक रूप में हिन्दू बनाकर थोप रहा था। यह हिन्दू धर्म कुछ और नहीं था सारे नकली देवी-देवताओं के करैक्टर को समझने के पश्चात भी यह ज्ञात होता है कि वह मुस्लिम धर्म का रूप ही है और हमारे इतिहास से विद्वेष करने यानि मूलनिवासी बौद्ध की बुद्धि पर थोपा गया विद्वेष है। इन नकली धर्म वालों की भारतीय बौद्ध इतिहास में कोई पहचान नहीं है,ना ही इनकी कोई उपलब्धि है ना ही कोई विशेष महत्व। तो भारतीय इतिहास में कोई दर्जा ना होने की वजह से,अपने आप को महान मूलनिवासी बौद्धों से महत्वपूर्ण दिखाने के लिए, मूलनिवासियों का असली इतिहास और बौद्धत्व को छुपाकर मानसिक भ्रमित करने के लिए और मूलनिवासियों को गुलाम जैसी मानसिकता थोपने के लिए और पिछड़ेपन को थोपने के लिए ही इस नकली धर्म की पृष्ठभूमि तैयार की और इस नकली धर्म की आड़ में हमारे गौरवशाली इतिहास को मनोवैज्ञानिक तौर पर कुंठित अवस्था में दर्शा कर थोपा गया। मनोवैज्ञानिक रूप में अगर समझें तो किसी कौम को दूसरी कौम पर राज करना है तो उनका स्वाभिमान गिरा दो। इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है कि जैसे शिव जैसे भंगेड़ी करैक्टर को हमारे इतिहास में प्राचीन बुद्ध के स्थान पर थोपकर भगवान बता कर गीता प्रेस गोरखपुर के सस्ते नकली साहित्य से भी प्रचारित करने से मनोवैज्ञानिक रूप में मूलनिवासियों को अपने ही पारिवारिक बौद्धिक प्रेम से दूर किया गया। जो चिढ़नवश अपने परिवार से दूर होने लगेगा, यानि तृष्णा से प्रभावित रहेगा उसकी बुद्धि को तृष्णा धीरे धीरे खाती रहेगी और वह कभी भी अपनी बुद्धि का श्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर
पाएगा। यानि मूलनिवासियों के मन में जो अत्यधिक वासना और चिढ़न थोपी गई है वह इस नकली टुच्चे करैक्टर शिव की आड़ में थोपी गई थी। यानि आज जिन भी मूलनिवासियों के घरों में पति-पत्नी या पारिवार के बीच में द्वेष है उसका कारण यह नकली धर्म ही है। चूंकि तृष्णा जो आगे की पीढ़ी में जा रहा है उसका कारण होता है माता पिता का मन और उनके मन में पहुंचाया गया नकली धर्म से। शिव को विध्वंसक बताया गया है जिसे इतिहास की किताबों में सिंधु घाटी सभ्यता के बुद्ध के नाम से जोड़कर प्रचारित किया गया है जबकि इतिहास में बहुत से बुद्ध हुए उन्होंने अपनी बुद्धि से अनेकों प्रकार के मानसिक मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक सूत्र दिए बुद्धि को समझने के। पूरे देश में 28 वें बुद्ध ने घूम घूम कर देश को बौद्त्व से जोड़ा और नकली धर्म की आड़ में उन्हें विध्वंसक ही बोल दिया, जो हिन्दू ब्राह्मण की सोच का दिवालियापन दर्शाता है। दूसरे दृष्टिकोण से देखा जाए तो 83 देशों में बुद्ध स्थापित हैं तो 83 देशों में बुद्धि जागृत हुई। नकली धर्म से शिव के लिए फैलाया गया विध्वंसक, जिसके हाथ में माला पकड़ा दिया गया और गले में सांप डाल दिया गया जो अत्यधिक हास्यास्पद और ब्राह्मणों की टुच्च निम्न सोच को भी दर्शाता है।
जब महान सरदार मनमोहन सिंह जी की सरकार के समय में कोर्ट में दो ऐतिहासिक कोर्ट केस दर्ज थे और इनके अंतर्गत हिन्दू धर्म का कुछ भी प्रमाणित नहीं हो पा रहा था तो इसके खत्म होने का समय निर्धारित हो गया था। तब महान बौद्ध सरदार मनमोहन सिंह जी की सरकार को हटाने के लिए ही एकदम से 2जी स्पैक्ट्रम की साज़िश की कहानी तैयार की गई जैसे 1950 के समय नकली धर्म की कहानी को बनाया गया था। 2जी कहानी की आड़ में नकली धर्म वाले नरेंद्र मोदी की सरकार बनाना यानि देश की संपत्ति और नकली धर्म का मनोवैज्ञानिक नियंत्रण बनाए रखना चाहते थे जो धीरे धीरे नष्ट हो चुका था। नकली धर्म वाले भी मुस्लिमों की तरह फतवा जारी करते हैं चुपचाप से और फिर इनका तीन वर्ण वाला तंत्र चालू हो जाता है लोगों के मन में यह बैठाने के लिए कि यही सही है बाकी सब गलत हैं, इसी प्रकार से वैश्या हिन्दू नरेंद्र मोदी को नकली ओबीसी( पहले उसकी जाति को ओबीसी में डलवाया गया फिर प्रचारित करवाया गया कि ये ओबीसी है) बना कर जितवाने के लिए मानसिक मुहिम तैयार की गई थी, और सबके आसपास एक ऐसा मनोवैज्ञानिक प्रभाव बनाया। मनोवैज्ञानिक रूप में यह बताया जाने लगा कि बुद्ध ने घर छोड़ा तो उसी प्रकार इसने भी छोड़ा जबकि इसकी जो सच्चाई बताई गई है वह इसके बिलकुल ही विपरीत निकली, चूंकि सोशल मीडिया पर पता चला कि वह गहने चुरा कर भागा था बाकि सच्चाई तो मोदी भी जानता है। हमारे देश में एक प्राचीन बौद्ध पद्धति रही है कि किसी को भी अपने मन में चल रहे विचारों को भंग करना है या समझना है तो एकांत में जाकर कुछ महीने अपने मन की सच्चाई को
खोजने में लगाने से मन में चलने वाले विचारों की सच्चाई पता चलती है। भगवान बुद्ध ने इस सच्चाई को जानने के लिए ही बौद्ध विहारों में आवागमन किया। जब इसको बुद्ध के घर छोड़ने के लिए इस मिथ्य से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा था तो यह अत्यधिक हास्यास्पद साबित हुआ। चूंकि नकली धर्म का मनोवैज्ञानिक प्रभाव पहले से ही देश में बनाया जा चुका था तो सबके मन में ओबीसी से जुड़ा हुआ होने की वजह इसे प्रचारित किया गया । परन्तु बौद्धत्व के रूप में देखा जाए तो देश के धन पर टुच्ची निगाह रखने के चक्कर में और नकली धर्म की आड़ में अपनी टुच्चता थोपने से बीमारी ग्रस्त ब्राह्मण राजपूत और वैश्या पैदा होने लगे। जिससे कि मानसिक गुलाम सोच इनके मन पर ही हावी होने लगी है जिसका परिणाम जेटली सुषमा पर्रिकर अटल का मानसिक बिमार स्थिति में सड़ातन असर में जाना इस सच्चाई को दर्शा देता है। जिस प्रकार के मानसिक अत्याचार इन्होंने नकली धर्म की आड़ में किए थे उससे इन्हें डर था कि नकली धर्म के खत्म होते ही मूलनिवासी इनसे नकली धर्म की वजह से बदला जरूर लेंगे इसलिए भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए हिन्दू धर्म वालों ने मूलनिवासियों के मन में मनोवैज्ञानिक रूप से हवा बनाई कि ये ओबीसी यानि मूलनिवासी है( मन के अंदर आवाज का आना यानि कि पूरे देश में मनोवैज्ञानिक रूप से प्रोपोगेंडे के रूप में लोगों के मन तक पहुंचाना दूसरे शब्दों में कहें तो टैलीपैथी के द्वारा मन को प्रभावित करना )। नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही देश की मूलनिवासी संपत्ति जो कि सरकारी उद्योगों इत्यादि के रूप में है को नकली धर्म के वैश्या हिन्दू के हवाले करना शुरू कर दिया क्यों? वर्ण व्यवस्था जो आज उल्टी हो चुकी है।
इस नकली धर्म को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने इस नकली धर्म को और उसके देवी देवताओं का चक्र खत्म करते हुए ,डॉ रमेश यशवंत प्रभु बनाम प्रभाकर काशीनाथ कुंते AIR1996SC1113, और मनोहर जोशी बनाम नितिन भाउराव पाटील AIR1996SC796 में हिंदू को धर्म से हटाते हुए सिर्फ जीवन जीने की कला मात्र बोला। यानी वर्ण व्यवस्था बचाने के लिए ऐसा कहा परंतु इन्हें ऐसा नहीं पता था कि कुंठित हिन्दू के नकली धर्म की वजह से मूलनिवासी बौद्ध सामाजिक बहिष्कार भी कर देंगे जिससे कि वर्ण व्यवस्था तो उलटी हो ही चुकी है साथ ही मूलनिवासी बौद्ध इनके ऊपर मानसिक रूप में हावी भी हो जाएंगे। अब चूंकि सत्य सबको साफ साफ दिखाई देने लगा है तो सभी मूलनिवासी बौद्ध जिन्हें नकली धर्म से गुमराह रखा गया था वे अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर चुके हैं। ऐसे में पूरे देश और विश्व में नकली धर्म बनाने वालों को हेय दृष्टि से भी देखा जाने लगा है। यह विचारधारा भी फैल गई है जो इनकी मानसिकता पर हावी होती गई जिससे इनका जीवन भी उसी प्रकार हो गया जैसे की देश में नीची जातियां बता कर उनका मानसिक शोषण किया गया था। दूसरे तरीके से देखा जाए जो शोषण इन्होंने नकली धर्म की आड़ में किया वह इनके अपने ऊपर ही पड़ने लगा इसीलिए बीजेपी की ईवीएम सरकार बनवाई गई और एक ईरानी मूल से जुड़े हिन्दू वैश्या नरेंद्र मोदी को नकली ओबीसी बना कर देश पर थोपा गया। देश में 70 सालों में एक भी एससी एसटी असली ओबीसी यानि देश के असली मूलनिवासी बौद्ध में से एक भी प्रधानमंत्री नहीं बन पाया, चूंकि नकली धर्म का मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा हुआ था। बस सिर्फ सरदार मनमोहन सिंह जी ही मूलनिवासी के रूप में स्थापित प्रधानमंत्री बनें, क्योंकि उनका अलग धर्म जिसमें बौद्धत्व की मानवता है उससे उन्हें मानसिक रूप से सहयोग मिला। नकली धर्म के खिलाफ काम करने के लिए तीस्ता सीतलवाड को यहां धन्यवाद करना बनता है जिन्होंने नकली धर्म के टुच्चेपन से देश को आजाद कराने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब नकली धर्म खत्म होने के बाद नकली भगवानों की कहानी को बचाने के लिए एक नए धर्म की आवश्यकता थी तो ईवीएम सरकार की मदद से ही नए धर्म को थोपना था, उसके लिए प्रचारित किया गया सनातन धर्म, परन्तु सनातन को परत दर परत खोलें तो इसका जुड़ाव तो बौद्ध परंपरा से जुड़ता है, और बौद्ध परंपरा यानि हमारे देश का असली बौद्धिक इतिहास है। फिर ये नकली टुच्चे से करैक्टर किस धर्म के बचते हैं? ये टुच्चे से करैक्टर और नकली हिन्दू धर्म कोर्ट में चैलेंज करके खत्म कर दिया गया है। अब नकली धर्म की साजिशें कामयाब करने के लिए दूसरा धर्म बनाया गया परंतु अब मूलनिवासी जागृत हो चुके हैं तो सनातन धर्म जो बनाया गया उसका असर हो गया सड़ातन। यानी नकली धर्म हिन्दू से हटाकर सनातन बनाने के लिए ईवीएम हैक करके और बाकी जातियों को यादव और चमारों (जो कि मूलनिवासी बौद्ध हैं) के विरुद्ध खड़ा करके नरेंद्र मोदी और अमित शाह जो ईरानी मूल का हिन्दू हैं (हिन्दू शब्द ईरानी है) और नकली धर्म में वैश्या वर्ण से हैं को मूल निवासियों के बीच नकली ओबीसी बनाकर सनातन की पृष्ठभूमि तैयार की और जिससे इनके सड़े मन की सोच जग जाहिर हो गई। वैसे अटल बिहारी भी सड़ातन की मौत ही मरा था, 15-20 साल तक सड़ कर रगड़कर, ऐसी स्थिति को आज सड़ातन धर्म की धार्मिक स्थिति कहा गया है। इस स्थिति को बौद्ध मूलनिवासी से अलग ही रखा जाए । इसे झूठ पर बनाए गए धर्म का असर भी कहा जा सकता है। सड़ातन असर जो नकली धर्म बनाने वालों को ही प्राप्त हुआ है। यह विचारणीय तथ्य है कि हिन्दू धर्म के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सनातन नामक नए धर्म का एकदम से प्रचारित किया जाना और बीजेपी सरकार के ब्राह्मण और वैश्या वर्ग पर ही नकली धर्म का असर पड़ना, एक प्रकार के मानसिक सत्य को स्थापित करती हैं कि झूठ पर बनाया गया धर्म झूठों को ही प्रभावित करता है जैसे जेटली सुषमा पर्रिकर अटल पर हुआ। चूंकि झूठ पर नकली धर्म को बचाने के लिए ही ईवीएम इत्यादि हैक करके सरकार बनाई गई और श्रेष्ठ सरदार मनमोहन सिंह जी (मूलनिवासी बौद्ध धारा से हैं) को अभद्र टिप्पणी करके इसलिए हटवाया गया था चूंकि वे नकली धर्म और हिन्दू ब्राह्मण से जुड़े नहीं थे विदेशी नहीं थे और महान बौद्ध विचारधारा के सिखि बुद्ध से जुड़े हुए हैं। सिखों के दस गुरुओं की परंपरा को बुद्ध बनने की परंपरा से जोड़कर देखा जाए तो यह प्रतीत होता है कि देश में सिखों ने बौद्ध सभ्यता से संबंधित जुड़ाव को दर्शाया है। जिस प्रकार नकली धर्म का फैलाव किया गया था उसी तरह एक मनोवैज्ञानिक प्रोपोगेंडा फैला कर नकली धर्म के हिन्दू वैश्या नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद पर बैठाने की तैयारी की गई थी एक झूठ फैला कर। यह झूठ फैलाने वाले आपके आसपास रहने वाले नकली धर्म से जुड़े हिन्दू ब्राह्मण और हिन्दू ईरानी (मुगल) लोग ही हैं। जब नकली धर्म का खात्मा शुरू हुआ तो देश के मूलनिवासी धन को लूटने के लिए ही हिन्दू वैश्या वर्ग के नरेंद्र मोदी और अमित शाह (शाह सरनेम का जुड़ाव मोहम्मद शाह मुगलों के आखिरी राजाओं में से एक था और नादिरशाह ईरानी राजा से जुड़ाव दिखाता है) को बीजेपी के द्वारा मूलनिवासी बौद्ध को गरीब करने के लिए ही देश के टैक्स के धन को और सरकारी संस्थानों को ईरानी हिन्दू वैश्या वर्ग के हवाले किया जा रहा था। देश में एकदम से धन की लूटपाट करने के लिए नोटबंदी जीएसटी इत्यादि करके किनको झूठ इत्यादि बोलकर और चोरी से धनाढ्य करने के चक्कर में मानसिक अपंग स्थिति में लाया गया है? इसमें अंबानी और अडानी का नाम सर्वोपरि है। देखा जाए तो नादिरशाह वाली लुटेरी मानसिकता होने की वजह से वैश्या वर्ग की संतानें भी बिमार ग्रस्त ही पैदा होने लगी है। इसका उदाहरण है मुकेश अंबानी का बेटा। किसी भी देश की सरकार इसलिए बनाई जाती है कि वह देशवासियों का हर हाल में ख्याल रखें, परन्तु यह कैसी सरकार है जो अपने ही देश के लोगों को लाकडाउन के समय में बस ट्रेन इत्यादि की सुविधा देने के बजाय उनसे दुगुने तिगुना पैसा वसूल कर रहे थे और मानसिक रोगी स्थिति में पहुँच रहे थे? ये वही नकली धर्म बनाने वाले लोग हैं हमारे देश में जो मूलनिवासी इतिहास को दबाए हुए बैठे थे। यहाँ पर एक वीर रोहित वेमुला की बात करना भी आवश्यक हो जाता है,आखिर इस बालक ने ऐसा क्या किया था जो हैदराबाद में क्रांति हो गई? रोहित वेमुला अंबेडकराइट छात्र था, इस वीर बालक ने नकली धर्म को फैलाने, उसके पीछे की मानसिक साजिश मूलनिवासियों को अपने ही पूर्वजों से बैर फैलाने की, और उनके अंदर डर पैदा करने के लिए,और मानसिक गुलाम बनाने के लिए ही इस नकली धर्म को बनाया गया था इस बात को खंडित करते हुए अंबेडकर विचार धारा को प्रचलित किया है। इस बालक की बाबासाहेब वाली विचार धारा पर मानसिक दबाव बनाया जाने लगा और उसे स्कोलरशिप से वंचित कर हास्टल से बाहर निकाल कर और नकली धर्म वाला मानसिक सप्रैशन दिया गया। इस सप्रैशन का एक और बड़ा उदाहरण एक इकलौते असली मूलनिवासी ओबीसी प्रधानमंत्री हैं जिनका नाम है देवेगौड़ा। इनको हर प्रोग्राम में सोते हुए दिखाया जाता था और दूसरे प्रकार से देखा जाए तो उनके मन पर भी टैलीपैथी से प्रभाव दिया जाता रहा होगा। टैलीपैथी भी उसी को प्रभावित करती है जिसने भंग अवस्था प्राप्त ना की हो। रोहित वेमुला के साथियों ने हैदराबाद में क्रांति पैदा की फिर उसकी मृत्यु पश्चात इस क्रांति को दबाने के लिए जेएनयू की कहानी को उससे बड़ा बना कर दिखाया गया और रोहित वेमुला की शहादत को उसके सामने छोटा किया गया ताकि उसे दबाया जा सके। परंतु रोहित वेमुला की क्रांति देश में नकली धर्म और नकली देशवासी यानि हिन्दू ब्राह्मण के चंगुल से देश को मुक्त रखने के लिए ही शुरू हुई है और उसकी क्रांति के बाद से ही नकली धर्म और उसे बनाने वाले और चलाने वाले मानसिक बिमारी ग्रस्त होते दिखाई देने लगे हैं और विश्व में हेय दृष्टि से भी देखें जाने लगे।
यह एक प्रकार से शुरुआत है बौद्ध देश में नकली धर्म वालों से मुक्ति की, यानी प्रकृति को सब सच पता है मन में चाहे कुछ भी छुपा हो। प्रकृति सब पढ़ लेती है और मूलनिवासी बौद्ध ही प्रकृति हैं, सिर्फ जरूरत है तो मन को बुद्ध से जोड़ने की, बुद्धि से जोड़ने की। इस बीजेपी सरकार को बनाने के पीछे और सरदार मनमोहन सिंह जी की कांग्रेस सरकार को गिराने के पीछे असली मंशा क्या थी?
नकली धर्म को बचाना और एक बहुत ही महत्वपूर्ण सत्य को छुपाना। असल में सरदार मनमोहन सिंह जी की सरकार में रघुराम राजन ने कहा था कि मंदिरों में जितना सोना है उस सोने को आरबीआई में रख दिया जाए । इसके पीछे एक कारण था कि ऐसा करने से रुपए की कीमत डॉलर के बराबर हो जाएगी और जो देश पर विदेशी कर्जा है वह बहुत कम रुपये में चुकता हो जाएगा। रघुराम राजन को सरदार मनमोहन सिंह जी की सहमति प्राप्त थी चूंकि वे स्वयं भी श्रेष्ठ अर्थशास्त्री हैं,इसी डर की वजह से नकली धर्म बनाने वाले हिन्दू ब्राह्मणों ने कांग्रेस को हटाने के लिए साजिशें शुरू की ताकि बौद्ध संपदा से जुड़े मंदिरों में रखे सोने का लाभ सभी बौद्ध मूल निवासियों और बौद्ध मुस्लिम को ना मिल जाए और सारा सोना हिन्दू ब्राह्मणों के हाथों से ना निकल जाए और इसलिए भी क्योंकि मूलनिवासी, सरदार मनमोहन सिंह जी की सरकार में स्वाभिमानी और धनवान होने लगे थे अपने खुद के कारखाने इत्यादि बनाने लगे थे जो नकली धर्म बनाने वालों की वर्चस्वता को भी खत्म कर चुका है। इसीलिए हो हल्ला कर के 2जी घोटाले की पटकथा लिख कर नरेंद्र मोदी (ईरानी मूल का हिन्दू) को प्रधानमंत्री बनवाया गया, इसलिए ही नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि देश के धन पर पंजा नहीं पड़ने दूंगा। मनोवैज्ञानिक रूप से वह इशारा कर रहा था कि देश का धन यानी सभी प्राचीन मंदिरों में रखा हुआ सोना जो कि मूलनिवासी बौद्ध संपदा है और पंजा यानी कांग्रेसी सरदार मनमोहन सिंह और कांग्रेस का हाथ का निशान, उन बौद्ध मंदिरों के सोने को कांग्रेस के द्वारा आरबीआई में नहीं रखने देगा।परन्तु मन के अंदर छुपी मानसिक कुंठा का शरीर पर असर दिखाई दे जाता है, जब शरीर कुलमुलाने लगा जिसके कारण नरेंद्र मोदी के द्वारा योगा को खूब प्रचलित किया गया था ( नकली धर्म वाले बौद्ध विपसना की बजाय योगा का प्रचार क्यों करता है? क्योंकि विपसना से बुद्धि जागृत हो कर विचारों को ही भंग कर देती है जिनसे बिमारी होगी और नकली धर्म वालों को भी वश में भी करती है, मन से नकली धर्म की सारी सच्चाई भी उजागर करती है और योगा सिर्फ शरीर के लिए है)। आज देश के सभी प्रमुख स्थानों पर कुंठित अयोग्य हिन्दू ब्राह्मणों को बैठाया गया लेटरल एंट्री से ताकि देश के धन को अलग-अलग तरह से लूटने के लिए साजिश की जा सकें। और इसीलिए नोटबंदी जीएसटी इत्यादि लगा कर ज्यादा से ज्यादा धन लूटने और आरबीआई के आपातकालीन फंड से पैसे चुरवाए गए, और ब्राह्मणों को उस पैसे को दिया गया ,परंतु चोर जो चोरी करता है वह मानसिक रूप से कैसा होता है विक्षिप्त, और चोरी पकड़ी गई तो हिन्दू ब्राह्मण ठाकुर वैश्या कैसे होते दिखाई दे रहे हैं, डर और झूठ से मानसिक रोगी स्थिति में। इसीलिए नकली धर्म और बीजेपी एकदूसरे को ही मानसिक मनोरोगी स्थिति में लाकर मार रहे हैं और ऐसी परिस्थितियों में यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि हिन्दू ब्राह्मण को तो राम मंदिर चाहिए था तो अब राम की तरह त्याग भी करना है ब्राह्मण ठाकुर वैश्या को, देश की राजनीति और देश के प्राचीन बौद्ध मंदिर और स्थलों से। अब बुद्धिमान बौद्ध मूलनिवासी ही इन दोनों को संभालेंगे। नकली धर्म कुछ और नहीं था, यह था नकली धर्म की आड़ में भारत का इस्लामीकरण, या दूसरे शब्दों में कहें तो इस्लामिक हिन्दूकरण जिसमें ब्रह्मा यानि हिन्दू ब्राह्मण अपनी बेटियों के साथ बनाएं संबंधों को धर्म बताकर मूलनिवासी बौद्ध के मन पर थोपता है। परन्तु बौद्ध विचारधारा में जागृत बौद्ध वासना से हमेशा ही मुक्त रहता है और वासना संबंध बेटियों से कभी नहीं होता, बेटियों से तो मानसिक प्रेम होता है। इसीलिए नकली धर्म की वासनात्मक टुच्चता से मुक्त होना ही मूलनिवासी बौद्ध के लिए बहुत आवश्यक हो जाता है। इसलिए आज मूलनिवासी बौद्ध के धम्म को पुनर्स्थापित कर देश को बौद्ध राष्ट्र घोषित करना और जितनी भी देश की संस्थाओं को नकली धर्म वाला बेचकर गया है उनका उचित मूल्यांकन कर उसे मूलनिवासियों को वापिस करने के लिए ही मूलनिवासी सरकार का चुना जाना बेहद जरूरी हो जाता है। अब हमारे देश में कोई भी मूलनिवासी भूखा नहीं सोएगा, खुशहाल और संपन्न रहेगा और देश की धन संपदा का मालिक रहेगा और जाग्रत अवस्था में रहेगा। एक मूलनिवासी बौद्ध ही अपने मूलनिवासी भाई के प्रति वफादार और मानवतावादी हो सकता है महान बौद्ध सिखों की तरह। चूंकि बौद्धिक मानवता का रूप सरदारों के लंगर में साफ दिखाई देता है। नकली धर्म वाले मानसिक मनोरोगी हैं जो नकली धर्म बना कर अपनी मानसिक मनोरोगी स्थिति को जेटली सुषमा पर्रिकर अटल के रूप में दिखा ही चुके हैं, जो कि बीजेपी की चोर और कुंठित मानसिकता से ग्रस्त हैं इसलिए सिर्फ जागृत बौद्ध मूलनिवासी ही देश में सत्य और मानवता को स्थापित कर संपूर्ण देशवासियों के मन और देश को खुशहाल रख सकते हैं। वैसे सच्चाई सामने आने से मूलनिवासी इन दोनों को ही अपने समाज से अलग कर रहे हैं, वैचारिक दृष्टिकोण से देखने पर भी ज्ञात होता है कि हिन्दू ब्राह्मणों और ईरानी हिन्दू राजपूतों और वैश्याओं ने धन तो बहुत लूट लिया पर अब मानसिक मनोरोगी स्थिति में पहुँच कर उस लूटे धन का कोई भी प्रयोग करने से दूर हो गए हैं, ऐसी बिमारियों से ग्रसित हो गये हैं कि जैसे मुकेश अंबानी के लड़के को बचपन से ही मधुमेह यानि डाइबिटीज और अस्थमा हैं। अब बाप ने जो भी धन मूलनिवासियों से लूटा और टैक्स के पैसे से चोरी किया वह उसकी औलादों को ही मानसिक अपंग स्थिति में लाकर खड़ा कर देता है चूंकि अत्यधिक लालच तृष्णा है और तृष्णा अपना असर जरूर छोड़ती है।
उसी प्रकार से हिन्दू अटल बिहारी ने मूलनिवासियों के विरुद्ध द्वेष में सरकारी पेंशन तो खत्म कर दी पर खुद पेंशन पर ही लार टपका टपका कर मरा और ऐसी स्थिति में जिनके लिए धांधली की उनमें से कोई उसको देखने के लिए फटका तक नहीं, ऊपर से मरने के बाद लाश और सड़ाई । इसलिए यहां पर साफ तौर पर कहा जा सकता है कि जो भी बौद्ध मूलनिवासी के विपरीत कोई कार्य करता है उसपर सड़ातन असर जरूर पड़ता है। इन्होंने बनाया है नकली धर्म, जो झूठ बोलकर मूलनिवासियों के महापुरुषों से चिढ़न रखकर खुद ही मानसिक अपंग स्थिति में लार टपका कर मरते हैं और झूठ का धर्म मूलनिवासियों के श्रेष्ठ मन पर थोपते थे जो नकली धर्म अब उन्हें ही मानसिक सड़ातन स्थिति में ला चुका है। अगर आपके आसपास कोई भी ऐसे नकली धर्म को आप पर थोपता हैं और वो हिन्दू ब्राह्मण या राजपूत ठाकुर वैश्या है तो तुरंत समझ जाओ ये मानसिक मनोरोगी है और किसी अंदरूनी बिमारी से ग्रसित है। इन्हें राम वाले त्याग की याद दिला कर चलता कर दीजिए। देश के पाठ्यक्रम में अभी भी जो रामायण महाभारत पढ़ाई जा रही है वो इनकी मनोरोगी स्थिति को दिखाकर बता रही है कि नकली धर्म वाले हिन्दू ब्राह्मण राजपूत वैश्या लोग मानसिक रूप से अत्यधिक मनोरोगी हैं नकली धर्म की आड़ में उसी मनोरोगी स्थिति को दिखा रहे हैं। जैसे कि सिकंदर हमारे देश में भजन कीर्तन करने आया था और बौद्धों को वो भजन कीर्तन नहीं चाहिए था तो वो इसलिए ही सिर्फ अल्पायु में मानसिक अपंग स्थिति में महामारी से मर जाता है यह सारा खेल मानसिकता का है। बौद्ध अपनी बुद्धि को जागृत करने और श्रेष्ठ अवस्था में रखते हैं और ब्राह्मण नकली धर्म की आड़ में अपने द्वेष को दर्शा रहा है।
मूलनिवासियों को नकली धर्म की आड़ में तृष्णा थोप दी गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा प्रचारित करके और खुद इच्छा शक्ति बढ़ाने और धन लूटपाट की साजिशें की गई और नकली धर्म में इतिहास में साजिश करने वाले हिन्दू ब्राह्मण को पुजवाया गया। सोचो कितने टुच्च किस्म की सोच है।
नकली धर्म बनने के बाद एक भी भगवान बनने लायक ब्राह्मण नहीं पैदा हो सका चूंकि मानसिकता से जिसके दिमाग में सिर्फ साजिश हो वो तो खुद ही वान यानि तृष्णा से ध्वस्त है वो क्या खाकर देश का निर्माण करेगा।
जो भी मनोरोगी नकली धर्म का प्रचार करे उसे बुद्ध की राह दिखाकर चलता कर दो और स्वयं पूर्ण सत्य पर ही रहो, पूर्ण सत्य की खोज मन में करते रहो और मन को अपनी की शरण में ही रखने से मन में आने वाली तृष्णा का पता चलता है जिसे अपने मन से भंग करने से मन श्रेष्ठता पर रहता है और जो कुछ भी पाना चाहता है उसे शांत मन से प्राप्त करता जाता है। मूलनिवासियों के प्रति जागरूक और वफादार रहिए चूंकि मन अगर चिढ़न यानि तृष्णा की तरफ रखते हैं तो यह स्वयं की ऊर्जा को ही नष्ट करती है और मन को सच्चाई पर और आस पास मनोवैज्ञानिक रूप में तृष्णा मुक्त रखते हैं तो स्वयं का मन श्रेष्ठ बुद्धि के प्रयोग से श्रेष्ठ कार्य करने में सक्षम रहती है ।आस्था अपने मन से अपनी बुद्धि पर रखी जाती है ताकि बुद्ध की शरण में मन पूर्ण जागृत अवस्था में रहे। जागृत मन को पूर्ण सत्य का बोध होता है, उसे पता होता है कि उसके मन में विचारों की उत्पत्ति कहां से हो रही है? कोई भी विचार कहां से आ रहा है और उस विचार को मन में बैठाने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा और जो भी बिमारी होती है उसका कारण मन में बैठाए गए बोझ यानि अत्यधिक तृष्णा की वजह से होता है। अपने माता पिता से द्वेष मुक्त रहने के लिए अपने मन का पूर्ण सत्य उनको बताते रहें ताकि अपने मन को शांति प्रदान कर सकें और उन्हें आपका बेहतरीन जीवन प्रदान करने के लिए आजीवन कृतज्ञ रहें ताकि मन हमेशा स्वस्थ रहे, चूंकि बचपन में गलत और सही का विश्लेषण बालक मन पर अंदरुनी प्रभाव छोड़ता है जिसका मनोवैज्ञानिक असर बड़े होने पर भी रहता है। ऐसे में माता-पिता से अपने मन के सत्य को जरूर बताए जाने पर मन में दबे हुए डर( जो कि माता पिता के मन से ही जुड़ा होता है और जो अपने मन को स्वयं नहीं समझते वे अपने बच्चों को स्वाभाविक रूप में पहुंचा देते हैं) से भी मुक्ति मिलती है। दूसरे तरीके से देखा जाए तो जब स्वयं के मन के भीतर जाकर अपने मन के नज़रिये को माता पिता के प्रति अपने मन में पैदा हुए राग द्वेष को जब उनसे माफी मांगते हुए साफ़ करते हैं तो वह जड़ यानि माता-पिता भी अपने मन से उस भाव को भंग कर देते हैं इस रुके हुए भाव को अपने मन से जड़ तक खत्म करने को ही बौद्धत्व कहते हैं और अपने मन से स्वयं समझ कर अपने शरीर में होने वाली हर प्रक्रिया को पहचानने को ही बौद्धत्व कहते हैं । बौद्ध प्रक्रिया अपने मन और उसकी सच्चाई को जानने की श्रेष्ठतम तकनीक है। बाकी नकली धर्म और उसकी टुच्चता का विश्लेषण आगे हैं।
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