जातियों की सच्चाई

#भंगी और #कश्यप  जाति का बौद्ध इतिहास
 भंग अवस्था प्राप्त करने वाले श्रेष्ठ बौद्ध मूलनिवासियों को भंगी उपाधि से नवाजा जाता था नालंदा विश्वविद्यालय और देश के हजारों बौद्ध विहारों में भंग अवस्था प्राप्त करने वाले बालकों को भंगी उपाधि दी जाती थी, इसी प्रकार कस्सापा बुद्ध से संबंधित फोलोअर्स कस्सप कहलाए। कस्सप बुद्ध बौद्ध इतिहास में 26वें बुद्ध थे। आज के धींवर यानी कश्यप मूलनिवासी बौद्ध हैं। धींवर ब्राह्मण मानसिक अपंग ने कश्यप समाज पर थोपा हुआ शब्द है। धीं यानी बेटी वर यानी पति। अपने ही पिता को बेटी का वर बता कर फैलाया गया। इस धींवर शब्द में ब्राह्मण मानसिक अपंग की अपंगता झलकती है। ब्रह्मा अपनी ही बेटियों से जोड़ कर दिखाया गया है और मोहम्मद ने भी बेटियों से निकाह किया। अब बौद्ध कस्सप समाज को धींवर कहना, इसके साथ ही भंगी समाज को वाल्मीकि बता कर प्रचारित करना दर्शाता है कि ब्राह्मण मानसिक अपंग ने बौद्ध इतिहास की सच्चाई को छुपाने के लिए उन्हें ऐसे शब्दों की जातियों से जोड़ कर मनोवैज्ञानिक प्रभाव से मुस्लिम धर्म थोपा। कस्यप और भंगी जाति नहीं उपाधि हैं जो हमारे बौद्ध इतिहास से संबंधित हैं। अब सोचिए कि धीरेन्द्र शास्त्री के भाई ने कश्यप सरनेम कहां से चुराया है। अब मुस्लिम ब्रह्मा बेटियों से संबंध रखने वाले ब्राह्मण मानसिक अपंग हमारे बौद्ध इतिहास से सरनेम चुराकर अपने आप को बौद्ध इतिहास में घुसेड़ रहा है जबकि यूनानी की पहचान आखिरी बुद्ध के भी बाद की है। मूलनिवासी बौद्ध को यूनानी ब्राह्मण मानसिक अपंग ने नीची जाति कहकर संबोधित किया। ब्राह्मण मानसिक अपंग आज हिंदू मुस्लिम कर रहा है और मुस्लिम धर्म की मानसिकता थोप रहा था, ऐसी मानसिक अपंगता पूरी दुनिया में कहीं दिखाई देगी क्या?

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