असलियत में हमारी बौद्ध परंपरा को नष्ट करके ये युनानी टुच्चों ने नकली धर्म बनाया है हमारी बौद्ध असलियत को छुपाने के लिए, जैसे हमारे बौद्ध राजा बलिराज को नकली रामायण में बंदर बाली बताकर प्रचारित किया और एक मनोवैज्ञानिक झूठ फैलाया कि वह सुग्रीव से हारा। बलिराज यानी सम्राट अशोक जो आधी दुनिया पर राज किए उनकी श्रेष्ठता के आसपास भी ब्राह्मण मानसिक अपंग खड़ा नहीं रह सकता। दूसरे हमारे बौद्ध सम्राट महिषासुर जिन्हें आज भी झारखंड में में पूजा जाता है, उनकी प्रबल ख्याति को धूमिल करने के लिए ब्राह्मण मानसिक अपंग ने दुर्गा टुच्ची की मनोवैज्ञानिक कहानी पैदा की, जिससे मूलनिवासी बौद्ध St को मनोवैज्ञानिक रूप में हीन दिखाया गया, इसी प्रकार हमारा 28 बुद्ध का इतिहास गायब किया गया चूंकि बुद्धि में हम सर्वश्रेष्ठ हैं और सर्वश्रेष्ठ पर राज करना असंभव है। इसलिए ही 28 वें बुद्ध को किसी टुच्चे विषाणु का अवतार बता दिया ताकि नकली धर्म की आड़ में ब्राह्मण मानसिक अपंग टुच्चा होते हुए भी मनोवैज्ञानिक एज ले सके। बहुत कुछ है नकली धर्म का टुच्चापन, अगर मनोवैज्ञानिक तौर पर समझेंगे तो ही ब्राह्मण मानसिक अपंग के टुच्चेपन को समझ पाएंगे।
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