जब बाबा साहेब डा अम्बेडकर जी ने कहा कि एससी एसटी मूलनिवासी बौद्ध हैं और ओबीसी की पहचान करने को कहा तो उनका कहना साफ था। हमारे बौद्ध देश में दो कौमें है एक जो विदेशी मूल की हैं और एक विदेशी मूल की। एससी कैटेगरी में उपाध्याय को डाल दिया जो कि यूनानी ब्राह्मण मानसिक अपंग है और जाट गूजर को ओबीसी में डाला गया जो कि विदेशी मूल से है।अब हमारी बौद्ध मूलनिवासियों का indigenous title जो UDHR provide करता है उसको हमें कैसे प्रथक करना होगा। सभी मूलनिवासी बौद्ध को ब्राह्मण ठाकुर वैश्या जाट गूजर से अलग कर, बौद्ध माना जाए तो तभी indigenous rights सिर्फ बौद्ध मूलनिवासियों को ही प्राप्त होंगे और रिजर्वेशन भी सिर्फ मूलनिवासी बौद्ध को ही मिलेगा चूंकि यही सिर्फ मूलनिवासी हैं।
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