हमारा समाज सबको समझा रहा है परन्तु ब्राह्मणवाद का नकली धर्म का मारा समाज खुद नकली धर्म में फंसाया गया है सबको समझा रहे हैं खूब पोस्ट डाल कर। पर झूठ पर आधारित ब्राह्मण मानसिक अपंग सर्वपल्ली जैसा चोर राष्ट्रपति बना दिया जाता है और जदुनाथ कायस्थ जैसा ईमानदार गायब हो जाता है।नकली धर्म की आड़ में बौद्ध सच्चाई जो मन की असली सच्चाई है उसे बदला गया है। गहराई से समझिए। नकली धर्म बनाया गया झूठ की आड़ में हमारे लोगों को आकर्षित किया गया वासना की तरफ, नकली टुच्चे शिव का लिंग पुजवाकर ।मन को नकली धर्म की आड़ में वासना और तृष्णा में इस कदर फंसा दिया गया कि अब हमारे लोगों को वासना में आकर्षण देकर यानी समझाकर इसे नकली प्यार जताना कहते हैं से आकर्षित करके किसी की भी बुद्धि को भ्रमित किया जा सकता है, पहला स्टेप ब्राह्मणवाद का। दूसरा स्टैप उन्हें दाम देकर खरीदा जाता है देश में जितने भी मूलनिवासी बौद्ध बीजेपी से चिपके हुए हैं वो यही है। वासना और दाम के बिकाऊ। तीसरा दण्ड देकर, लालू प्रसाद यादव जी को जनेश्वर मिश्र नामक टुच्चे मानसिक अपंग के किए गए घोटाले को थोपकर उसमें फंसाकर जेल भिजवा कर। जो अलग हैं बीजेपी से उनमें मायावती और मुलायम सिंह यादव, इन दोनों को चुप कराया गया पहले नकली केस बनवाकर और उसमें फंसाकर फिर सुप्रीम कोर्ट में सेटलमेंट करवा कर। ये दोनों ही चुपचाप बैठे रहे। मुलायम अपने मन से फंसा रहा और घुट घुट कर मर गया। मायावती अब दण्ड में फंसीं है। साम दाम दण्ड हो गया, बचा भेद। अब किसी का भी भेद जानना हो या नया भेद बनाना हो तो किसी भी ब्राह्मण मानसिक अपंग की बेटी को तैयार किया जाता है फंसाने के लिए, अगर आदमी है तो। इसमें फंसाया गया तुम्हारे सुप्रीम कोर्ट के जज को जिसने राम मंदिर का निर्णय दिया। ऐसे उसे भी फंसाया गया और निर्णय अपने बस में लिया गया। ये हो गया भेद। साम दाम दण्ड भेद। अब तुम बताओ क्या समझाना चाहते हो लोगों को। तुम समझाओ कि वासना में मत फंसो, तो समाज में कितने बुद्ध बने जो वासना से मुक्त हैं और औरत के बस में नहीं आ सकते हैं। ब्राह्मण मानसिक अपंग का धर्म तो पता ही होगा, ब्रह्मा बेटी संभोग, गायत्री सरस्वती दोनों उसकी बेटियां हैं। जिसने अपने बाप से ही संभोग कर लिया उसे किसका डर, ऐसी लड़की को भेजा जा सकता है तुम्हारे जज को फंसाने के लिए। तुम्हार जज अगर डरपोक है तो लड़की जिसे बचपन से संभोग करके और विपसना इत्यादि से ट्रेनिंग दी गई है आदमी फंसाने की तो उसके हिप्नोटिज्म से कौन बचेगा, सिर्फ 28 वें बुद्ध। तो अब समाज को क्या समझा रहे हो दोनों लोग। वासना से बचो, बचपन से जो नकली धर्म पूज रहा है जिस धर्म से कूट कूट कर वासना थोपी गई है वो क्या घंटा तुम्हारी सुनेगा। सिर्फ सरदारों ने अपना धर्म अलग करके अपने बौद्धत्व को बचाया है। वो तुम्हारी सुनेंगे, चमारों में कबीर और रैदास हैं, वो तुम्हारी सुनेंगे, लेकिन सिर्फ वो जो विपसना करते हैं। बाकी नकली धर्म के फंसे, वासना और पैसे के दलाल, वो सिर्फ बीजेपी में जाएंगे। अब किसे क्या सुनाना चाहते हो, पहले अपनी बुद्धि की समझ में पैदा कर लो। जो बुद्ध बन जाएगा तो सबके मन में टैलीपैथी से समझा देगा, उसकी बात सब समझ जाएंगे। सिर्फ भंग अवस्था पूर्ण सत्य है। बुद्ध पूर्ण सत्य हैं। बाकी ब्राह्मण मानसिक अपंग के ब्राह्मणवाद के दलाल हैं। सिर्फ एक है जो दलाली से बहुत बाहर है पहला सरदार जो बहुत असरदार है। जैसे सरदार मनमोहन सिंह जी और दूसरा अपना महान बौद्ध चमार चंद्रशेखर। तो अपने बच्चों को विपसना बचपन से सिखाइए, सेक्स एड्युकेशन दीजिए, और मन की हर सच्चाई उनके साथ शेयर कीजिए ताकि उनका मन आपके अंदर की फंसीं वासना के डर को अपने डर के रूप में हावी ना करने लगे। असर वासना हावी हो रही है तो परिवार को अपने मन का सच बता दो।
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