संस्कृत भाषा का निर्माण कब हुआ होगा?
जब हमारा बौद्ध इतिहास का आखिरी नालंदा विश्वविद्यालय जलवा दिया गया तो उस काल में हमारे बौद्ध विहार के सारे सूत्रों को अपने पास इक्ट्ठा करने के लिए चोर ब्राह्मण ने ये हरकत करी और संस्कृत का निर्माण किया गया और उसके बाद संस्कृत को सिर्फ टुच्च ब्राह्मण ही पढ़ते थे। परंतु हमारी बौद्ध परंपरा और विपसना को बचाने का कार्य रैदास साहब गुरु नानक साहब और कबीर साहब जी ने किया। इतिहास में इन बौद्ध पंथों का निर्माण करने वाले हमारी बौद्ध परंपरा को ही आगे ले जा रहे थे।
हमारी पाली भाषा से जन्मे शब्दों को आज भी रीजनल भाषाओं में प्रयोग किया जाता है जैसे ओला शब्द मराठी का शब्द है और हमारे मेरठ शहर की तरफ हमारे बाबा एक शब्द का प्रयोग करते थे आल्ला, जब भी हमारे घर में पोछा लगाया जाता था और हमारे बाबा घर के अंदर आते थे तो वो इस शब्द का बखूबी इस्तेमाल करते थे कि तूने तो फर्श आल्ला कर दिया। अब आल्ला उत्तर प्रदेश पश्चिम का शब्द है और ओला महाराष्ट्र मुंबई में प्रयोग होने वाला शब्द है। दोनों में समानता देखिए। इन दोनों शब्दों का अर्थ एक ही है यानी गीला। अब रीजनल भाषाओं में पाली प्राकृत का जुड़ाव है। अगर ब्राह्मण टुच्च हमारे देश में नहीं होता तो हमारे बौद्ध देश में नए हिंदी शब्द की जरूरत नहीं होती और गीला शब्द का निर्माण करने की आवश्यकता ही नहीं थी। इसी प्रकार से शब्दों का निर्माण ब्राह्मण टुच्चे ने अर्थ का अनर्थ करने के लिए किया गया है। हमारी प्राचीन भाषाओं का जुड़ाव हिंदी भाषा से खत्म किया गया है। इसीलिए कहा है कि मनुष्य शब्द को ब्राह्मण टुच्चे ने मनु स्मृति लिखने वाले मनु से जोड़ कर क्यों पैदा किया? यही है ब्राह्मण का टुच्चापन और उसके झूठे ज्ञान का पर्दाफाश।
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