इतिहास सबूतों के साथ दोबारा लिखा जाएगा।
जैसा कि बताया गया है कि अर्थशास्त्र को चाणक्य ने बनाया था, चाणक्य के दो और नाम जोड़े गए हैं, एक कौटिल्य और दूसरा विष्णु गुप्त, इतने नाम एक ही आदमी के? ये इतिहास को छुपाकर नामों में उलझाने के लिए कहानियां बनाई गई है। चाणक्य के होने का कोई भी ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। इसके नाम के साथ अर्थशास्त्र जोड़ कर दिखाया गया है, अर्थशास्त्र को 1905 में आर शमासास्त्री ने लिखा और ये बताकर फैला दिया गया कि इसे चाणक्य नाम के गधे ने मौर्य काल में लिखा था। इसके ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है बस इस शमासास्त्री ने ये बता दिया कि कोई चाणक्य था जो ब्राह्मण था और यह मौर्य काल में था। इस प्रकार बौद्ध इतिहास में गधे ब्राह्मण को घुसेड़ा गया। अब प्राचीन पाली इतिहास का बहुत कुछ चीन में मिलेगा जिसमें सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का असली इतिहास मिल सके। एक आदमी को तीन नाम के साथ जोड़ कर बताया गया है यानी की नामों के साथ फंसाया गया है। इसका सीधा प्रमाण इन नामों की खुदाई करने से प्राप्त होता है और असली प्रमाण हैं सम्राट अशोक के शिलालेख। यानी ब्राह्मण के पास हमारे बौद्ध इतिहास के प्रमाण रहे हैं जो उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को जलवाकर उसमें से चुराए होंगे। उस बौद्ध इतिहास में ब्राह्मण सास्त्री के द्वारा एक नकली नाम चाणक्य को घुसेड़ा जाता है और टुच्चे ब्राह्मण को महत्व देने के लिए असली इतिहास में नकली धर्म के साथ नकली कहानियों को इतिहास बनाकर मूलनिवासी बौद्ध का वर्चस्व इतिहास गायब कर दिया जाता है और । एक सदी बीतने के बाद नकली धर्म की पोलें खुलती हैं तो बुद्ध का जिक्र होता है। ब्राह्मण इतिहास एक बुद्ध की बात करता है और असलियत में 28 बुद्ध निकल कर आ जाते हैं। बीच में जैन धर्म को घुसेड़ा जाता है और 23 तीर्थांकर घुसेड़े जाते हैं। ये धर्म भी घुसेड़ा जाता है बिना प्रमाण के। हमारे देश के असली इतिहास में बहुत से झोल हैं जिन्हें नकली धर्म के ब्राह्मण ने अपने आप को दिखाने के लिए प्राचीन इतिहास में घुसेड़ा है। बिना ऐविडेंस के जो भी प्राचीन इतिहास लिखा गया है वह दोबारा से लिखा जाना है और इसके लिए भी राष्ट्रपति जी को इस मुद्दे पर बात करनी चाहिए।
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