ब्राह्मण ने टुच्चता और दुष्टता से जो जातिवाद और नकली धर्म की पटकथा, ऊंच-नीच का व्यवहार पैदा किया है उसके विपरीत एक नई सोच पैदा करने का समय आ गया है। आज चमार भंगी महार इत्यादि को महान मूलनिवासी बौद्ध मानेंगे जिन्हें दुनिया की सबसे बुद्धिमान होने का श्रेय दिया जाएगा। अब आता है वर्गीकरण में ब्राह्मण जिसे नकली धर्म में ब्रह्मा बेटी चोद बताकर फैलाया गया है। अब एक बेटी चोद को हेय दृष्टि से देखा जाए या फिर.... यह बहुत हास्यास्पद विषय है। अब जिसपर पूरी दुनिया हंसे वो हमारे देश में नकली धर्म की आड़ में अपने को क्या दिखाता फिर रहा है सबको समझ आ जाना चाहिए। दूसरा वर्ग है ठाकुर ठुकराइन। ये ठाकुर रजवाड़ों की और हरम की हराम की पैदावार है। इन्हें 15वीं शताब्दी में रांडों की पैदावार बताया जाता था यानी इन्हें रांडपूत कहा जाता रहा है। इन्हीं रांडपूतों को नकली धर्म की आड़ में फैलाया गया राजपूत। महान बौद्ध मूलनिवासियों के सामने इन टुच्चे रांडपूतों को ऊंचा बताकर फैलाया गया। जो हर चौराहे पर ठुकता फिरे वो ठुकराइन। अब ऐसे टुच्चे को महान बौद्ध से ऊंचा दिखाया जाना जरूरत से ज्यादा ही हास्यास्पद है। इसलिए राजपूत एक गाली है जिसके पीछे रांडपूत छुपा बैठा था। इस सच्चाई को हरएक मूलनिवासियों तक पहुंचना है। अब बात करते हैं तीसरे वर्ग की जो है वैश्या वर्ग। यह वो वर्ग है जो पैसे के लिए तन मन औरत तक बेच दे। इस वर्ग के नाम से ही यह टुच्चा दिखाई देता है। अब ऐसे टुच्चे वर्ग को किन नकली धर्म के मूर्खों ने ऊंच बताया यह अत्यंत हास्यास्पद विषय है। इसलिए सभी मूलनिवासी बौद्ध बुद्ध मुक्ति आंदोलन का हिस्सा बन इन टुच्चे वर्गो को हेय दृष्टि से देखा जाए। ये हमारे बौद्ध इतिहास को खत्म करने की साज़िश करने वाले विदेशी मूल के टुच्चे हैं। इसलिए सभी मूलनिवासी बौद्ध को सम्मान दृष्टि से देखा जाना चाहिए और ब्राह्मण ठाकुर वैश्या को हेय दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
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