इच्छाओं की पूर्ति या इच्छा की

कुछ बेवकूफ अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए नकली धर्म के जानवर पूज रहे हैं। कुछ गधे जानवरों की तरह कांवड़ डोने जा रहे हैं और इनमें से किसी की भी इच्छाएं पूरी नहीं होंगी। ऐसा क्यों होगा? बचपन से लेकर बड़े होने तक इच्छाओं पर इच्छाएं भरते चले गए पर कोई भी इच्छा पूरी नहीं हुई, क्योंकि उस इच्छा को आपने खुद पैदा नहीं किया सारी इच्छाएं मां बाप के अधूरे मन से आईं हैं। जो इच्छाएं खुद अधूरी थी वो तो अधूरेपन की आदि हैं। वो कहां पूरी होती हैं। पहले जो इच्छाएं भरी पड़ी हैं मन में उन्हें खत्म करो, यहां बौद्धत्व काम करता है। अब एक खास इच्छा को पकड़ो और अपनी बुद्धि से इच्छा शक्ति पर काम करते हुए उस इच्छा के इर्द-गिर्द जानकारी हासिल करो। जो बौद्धत्व से साफ मन हासिल कर लेते हैं उनका मन तीव्र होता जाता है। जितना तीव्र मन होगा उतनी जल्दी इच्छा को प्राप्त किया जा सकता है।

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