इमोशंस कहां से पैदा होते हैं

 जब बच्चा मां के पेट में होता है तो जब मां के पेट में ही बच्चे का दिमाग बनना शुरू होता है तो मां की इमोशनल स्थिति बच्चे के मन को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वह है पिता से की गई बातचीत जो मां के कानों से बच्चे मेंबन रहे दिमाग में धीरे धीरे इक्ट्ठी होती जाती है। जैसे मोबाइल में जो रोज़ ऐप्स में आता है वह मोबाइल की मैमोरी में इक्ट्ठा होता जाता है। जैसे जैसे बच्चे का दिमाग बनता जाता है पिता के इमोशंस मां की समझ के साथ बच्चे के मन में जाते रहते हैं। बच्चे का मन पूरे जीवन इन्हीं विचारों के इर्द-गिर्द रहता है। बच्चा कुछ इमोशंस के साथ पैदा होता है और कुछ विचार वह पैदा होने के पांच साल तक लेता है। फिर यहां से वो इमोशंस पर रुकना शुरू होता है। इन्हें ही बौद्ध ज्ञान से पहचाना जाता है। इन्हीं इमोशंस का पूरे जीवन भर बीच बीच में ठहरना जो पूरे जीवन चलता है इसी को vicious circle कहते हैं।  जब यह आता है तो कोई गुस्सा, कोई चिढ़न, कोई डर इत्यादि इमोशन ठहरता है। जब मन ऐसे इमोशन पर रुकता है तो मन उसमें रुकता है और बार बार उस विचार के इर्द-गिर्द कहानियां बनाता है। इसी vicious circle को ब्रेक करने से मन इस स्ट्रैस से आज़ाद हो जाता है। यही बुद्धिस्म का स्वरूप है।

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