एक होता है अपने में बदलाव करने का रास्ता और एक होता है मन को परिवर्तित करने का रास्ता। बदलाव में आप अपने आप को बदलते हैं । आपको अपने अंदर कुछ नापसंद होता है तो आप उसे बदलते हैं । अगर बदलाव नापसंद हुआ आने वाले समय के साथ तो ऐसे में सिर्फ अपने आप को बदलते रहोगे और चाहोगे कि लोग आपको बदले हुए रूप में पसंद करेंगे। अब गौर करने वाली बात यह है कि आप अपने आप को नापसंद क्यों कर रहे हो? यह ब्राह्मणवाद है जो आपको अपने आप को नापसंद करने पर मजबूर करता है। इसे अगर परिवर्तित कर देते हैं तो अब आप श्रेष्ठ हैं। आप अपने अंदर के झूठ को पहचान लीजिए और उसे सच्चाई से परिवर्तित कर दीजिए।
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